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अंग्रेजों के बनाए गए दिल्ली यूनिवर्सिटी एक्ट को संशोधित कर दिल्ली में नए काॅलेज और यूनिवर्सिटी खोलने का रास्ता साफ करे केंद्र सरकार- सीएम अरविंद केजरीवाल

अंग्रेजों के बनाए गए दिल्ली यूनिवर्सिटी एक्ट को संशोधित कर दिल्ली में नए काॅलेज और यूनिवर्सिटी खोलने का रास्ता साफ करे केंद्र सरकार- सीएम अरविंद केजरीवाल

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में यूनिवर्सिटी और काॅलेजों की संख्या काफी कम होने की वजह से कई काॅलेजों में कटआँफ 100 प्रतिशत तक पहुंच गया है और एडमिशन के लिए मारामारी हो रही है। हम दिल्ली में कई नए काॅलेज और यूनिवर्सिटी खोलना चाहते हैं, लेकिन दिल्ली यूनिवर्सिटी एक्ट इसमें अड़चन पैदा कर रहा हैं। इसलिए मैने अंग्रेजों द्वारा बनाए गए दिल्ली यूनिवर्सिटी एक्ट 1922 के सेक्शन 5(2) को हटाने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र लिखा है, ताकि दिल्ली में नए काॅलेज और यूनिवर्सिटी खोलने का रास्ता साफ हो सके। सीएम केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में हर साल करीब 2.5 लाख बच्चे 12वीं पास करते हैं, इसमें से केवल 1.25 लाख बच्चों को ही दिल्ली के काॅलेजों या यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिल पाता है। वर्तमान में दिल्ली यूनिवर्सिटी से 91 और आईपी यूनिवर्सिटी से 127 काॅलेज संबद्ध हैं और अब उनकी क्षमता भर हो चुकी है, इसीलिए डीयू ने पिछले 30 वर्षों में एक भी नया काॅलेज नहीं खोला है।

60 प्रतिशत अंक वाले बच्चों को भी उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है- सीएम अरविंद केजरीवाल

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने डिजिटल प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि मैंने कुछ दिन पहले अखबारों में पढ़ा कि दिल्ली के कुछ कॉलेजो में 100 प्रतिशत कट ऑफ है, जो बच्चे 12वीं कक्षा पास करने के बाद कॉलेजों में एडमिशन लेने की कोशिश कर रहे हैं, उनको बहुत तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। अगर 100 प्रतिशत कट ऑफ है, तो बाकी बच्चे कहां जाएंगे? जिन बच्चों को 90 प्रतिशत, 95 प्रतिशत, 80, 70 या 60 प्रतिशत अंक मिले हैं, उनका भी उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। ये बच्चे कहां जाएंगे? ऐसा क्यों हो रहा है कि कटआँफ इतना ज्यादा जा रहा है? इसमें बच्चों की कोई गलती नहीं है। इसमें हम सब की गलती है, सभी सरकारों की गलती है, अभी तक दिल्ली में जितनी भी सरकारें आईं, उन सबकी गलती है, हमारी गलती है, केंद्र सरकार की गलती है।

दिल्ली में बच्चों की संख्या जिस तेजी से बढ़ रही है, उतनी तेजी से काॅलेजों व यूनिवर्सिटी की संख्या नहीं बढ़ी- सीएम अरविंद केजरीवाल

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के काॅलेजों मे कटआँफ 100 प्रतिशत तक इसलिए पहुंच गया है, क्योंकि दिल्ली के अंदर कॉलेजों की और विश्वविद्यालयों की बहुत ज्यादा कमी हो गई है। काॅलेज और विश्वविद्यालयों में सीटों की कमी है और बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिस तेजी के साथ बच्चों की संख्या बढ़ रही है, उसी तेजी के साथ कालेजों और विश्वविद्यालयों की संख्या भी बढ़ने चाहिए थे। दिल्ली देश की राजधानी हैं। आज अगर सिर्फ दिल्ली की बात करें, तो दिल्ली में हर साल करीब 2.5 लाख बच्चे 12वीं पास करते हैं, उनमें से केवल 1.25 लाख के करीब बच्चों को ही दिल्ली के कॉलेजों में एडमिशन मिल पाता है। बाकी 1.25 लाख बच्चे कहां जाएंगे? यानि कि दिल्ली के अंदर जितने भी कॉलेज हैं, उनमें केवल 50 प्रतिशत दिल्ली के बच्चों के लिए क्षमता है बाकी बच्चे कहां जाएंगे। एडमिशन के लिए एक सीट पर दो-दो बच्चे कोशिश कर रहे हैं, इसीलिए एडमिशन को लेकर इतनी ज्यादा मारामारी है।

दिल्ली में इस समय बहुत सारे कॉलेज और यूनिवर्सिटी खोलने की जरूरत है- सीएम अरविंद केजरीवाल

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के अंदर इस समय बहुत सारे कॉलेज और यूनिवर्सिटी खोलने की जरूरत है। इसके लिए दिल्ली सरकार तैयार हैं, हम तैयार हैं। हम नए कालेजों और विश्वविद्यालय में निवेश करने के लिए तैयार हैं, हम नए काॅलेज और विश्वविद्यालय खोलने के लिए तैयार हैं। लेकिन नए काॅलेज या यूनिवर्सिटी खोलने में हमारे सामने एक बहुत बड़ी कानूनी अड़चन आ रही है। मैं बता दूं कि आज की तारीख में दिल्ली में दिल्ली यूनिवर्सिटी है। दिल्ली यूनिवर्सिटी से 91 कॉलेज और संस्थान संबद्ध हैं। दिल्ली में आईपी यूनिवर्सिटी है। आईपी यूनिवर्सिटी से 127 कॉलेज और इंस्टीट्यूशन संबद्ध हैं। इसके अलावा आईआईटी दिल्ली है और एम्स के अलावा दिल्ली सरकार के 9 विश्वविद्यालय हैं, दिल्ली में यह मोटे तौर पर उच्च शिक्षा के संस्थान हैं।

दिल्ली यूनिवर्सिटी एक्ट का सेक्शन 5(2) नए काॅलेज और यूनिवर्सिटी खोलनें में अड़चन पैदा कर रहा है- सीएम अरविंद केजरीवाल

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अंग्रेजों ने 1922 में दिल्ली यूनिवर्सिटी एक्ट बनाया था और उस समय इसी एक्ट के तहत दिल्ली यूनिवर्सिटी बनाई गई थी। इस दिल्ली यूनिवर्सिटी एक्ट में यह लिखा हुआ है कि अगर दिल्ली में कोई भी नया कॉलेज खुलेगा, वह सिर्फ दिल्ली यूनिवर्सिटी के साथ संबद्ध हो सकता है और किसी भी यूनिवर्सिटी के साथ संबंद्ध नहीं हो सकता है। जैसा की मैने बताया कि पहले से ही दिल्ली यूनिवर्सिटी से 91 काॅलेज संबद्ध हैं। पिछले 30 साल में दिल्ली यूनिवर्सिटी ने कोई भी नया कॉलेज नहीं खोला है। पिछले 30 वर्षों में दिल्ली यूनिवर्सिटी से किसी भी नए कालेज को संबद्धता (एफ्लिएशन) नहीं मिली है। क्योंकि दिल्ली यूनिवर्सिटी की क्षमता पहले ही भर चुकी है, अब वो और नए काॅलेज की संबद्धता नहीं कर सकते हैं। दिल्ली के अंदर नई यूनिवर्सिटी खुल नहीं सकती है, क्योंकि यह दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेक्शन 5(2) में लिखा है कि कोई भी नया कॉलेज खुलेगा, तो वो केवल दिल्ली यूनिवर्सिटी से संबद्ध होगा। इसलिए कोई यूनिवर्सिटी भी नहीं खुल सकती है और कोई भी नया कॉलेज नहीं खुल सकता है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी एक्ट को बदलना जरूरी हो गया है, ताकि नए काॅलेज खोलने का रास्ता साफ हो सके- सीएम अरविंद केजरीवाल

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 1998 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के इस एक्ट में मामूली सा संशोधन करके यह कहा गया था कि दिल्ली के साथ-साथ आईपी यूनिवर्सिटी के साथ भी किसी काॅलेज को संबद्ध किया जा सकता है। आईपी यूनिवर्सिटी केवल प्रोफेशनल कोर्स के लिए बनाई गई थी। यह यूनिवर्सिटी रेगुलर बीए, बीएससी के लिए नहीं बनाई गई थी। अब आईपी यूनिवर्सिटी के साभी भी 127 कॉलेज संबद्ध हो चुके हैं और अब उसकी भी क्षमता भर चुकी है। इसलिए अब यह जरूरी है कि अंग्रेजों के द्वारा बनाए गए इस कानून को अब बदला जाए। हमारे बच्चों को उच्च शिक्षा की जरूरत है। 12वीं क्लास तक उनको पढ़ाने के लिए हमने दिल्ली में खूब स्कूल बना दिए, स्कूल में बुनियादी सुविधाएं अच्छी कर दी। अब हम बहुत से कॉलेज और यूनिवर्सिटी बनाना चाहते हैं।

सेक्शन 5(2) को हटाने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र लिखा है- सीएम अरविंद केजरीवाल

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मैने आज केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री रमेश पोखरियाल जी को चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी के जरिए दिल्ली के लोगों की तरफ से उनसे अनुरोध किया है दिल्ली यूनिवर्सिटी के इस कानून के सेक्शन 5 (2) को हटाया जाए, ताकि हम दिल्ली के अंदर कॉलेज और यूनिवर्सिटी खोल सकें। नए काॅलेज और यूनिवर्सिटी दिल्ली सरकार के साथ केंद्र सरकार भी खोलेगी, जिससे सभी बच्चों को एडमिशन मिल सके। जैसा कि मैने बताया, करीब 1.25 लाख बच्चे दिल्ली के ही हैं, जिनको एडमिशन नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा, पूरे देशभर के लोग दिल्ली की तरफ देखते हैं, पूरे देशभर बच्चे दिल्ली में पढ़ने के लिए आते हैं। उनके लिए भी हमें नए कालेज, इंस्टीट्यूशंस और यूनिवर्सिटी खोलने की जरूरत है। मैं उम्मीद करता हूं कि केंद्र सरकार इस बारे में विचार करेगी और अंग्रेजों के जमाने के इस कानून को बदलेगी। मैं समझता हूं कि इससे बच्चों को बहुत राहत मिलेगी। इस समय बच्चों के उपर एडमिशन को इतना ज्यादा तनाव है। दिल्ली के यूनिवर्सिटी और काॅलेजों में आसानी से एडमिशन पाने के लिए बच्चे 12वीं की परीक्षा में इतनी मेहनत करते हैं जिससे उनका अच्छा प्रतिशत आ सके। अब तो 100 प्रतिशत पर उन्हें एडमिशन मिलेंगे। ऐसे में दिल्ली के बच्चे कहां जाएंगे। एडमिशन को लेकर बच्चों में यह जो तनाव है, यह तो सिस्टम की वजह से है, हमें इसको खत्म करना पड़ेगा, हमें सिस्टम को ठीक करना पड़ेगा।

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