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अगर बिजली का संकट नहीं है तो यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ केंद्र सरकार को पत्र क्यों लिख रहे हैं? – सत्येंद्र जैन

अगर बिजली का संकट नहीं है तो यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ केंद्र सरकार को पत्र क्यों लिख रहे हैं? – सत्येंद्र जैन

दिल्ली के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने सोमवार को बिजली के संकट को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय तापविद्युत निगम लिमिटेड (एनटीपीसी) से दिल्ली को लगभग 4000 मेगावाट बिजली मिलती थी लेकिन आज की तारीख में उससे आधी बिजली भी नहीं मिल पा रही है। यह चिंता की बात है। पूरे देश में बिजली का संकट है। उन्होंने कहा कि अगर बिजली का संकट नहीं है तो पूरे देश में बिजली के कट क्यों लग रहे हैं? उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी ने मोदी सरकार को पत्र क्यों लिखा? देश में बिजली का संकट है और केंद्र सरकार जब इसे समस्या मानेगी तभी इसका समाधान निकल पाएगा।

दिल्ली के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि किसी भी पॉवर प्लांट में 15 दिन से कम का स्टॉक नहीं होना चाहिए। अभी ज्यादातर प्लांट में 2-3 दिन का स्टॉक बचा है। केंद्र सरकार ये बताए की एनटीपीसी के सारे प्लांट जब 50 से 55 फीसद क्षमता पर काम कर रहे हैं तो फिर कोयले की कमी कैसे उत्पन्न हो रही है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर. के. सिंह के देश में बिजली संकट ने होने के बयान पर का जवाब देते हुए सत्येंद्र जैन कहा कि अगर केंद्र सरकार कह रही है कि बिजली का संकट नहीं है तो देश के अलग-अलग मुख्यमंत्री इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री जी को चिट्ठी क्यूँ लिख रहे हैं? यहा तक की उत्तरप्रदेश में जहाँ भाजपा की खुद की सरकार है वहाँ सीएम योगी मोदी सरकार को पत्र क्यों लिख रहे हैं? इस समय कोयले की बहुत बड़ी समस्या है। समस्या है तभी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी द्वारा पत्र लिखा गया है। केंद्र सरकार को इसे एक समस्या मानना चाहिए तभी इसका समाधान हो सकेगा।

उन्होंने आगे कहा, “दिल्ली में फ़िलहाल बिजली की मांग कम है। एक समय पर बिजली की मांग 7300 मेगावाट से भी ज्यादा थी, जो आज के समय में घट कर 4562 मेगावाट हो गई है। मांग कम होने के बाद भी हमें बिजली 17 से 20 रुपए की दर पर खरीदने पड़ रही है। दिल्ली सरकार के सबसे ज्यादा पॉवर परचेस एग्रीमेंट एनटीपीसी के साथ है लेकिन उन्होंने अपने प्लांट में बिजली उत्पादन क्षमता 50 फीसद कर दी है। एग्रीमेंट के हिसाब से एनटीपीसी को साल में 85 फीसद समय पूरी बिजली देनी होती है और 15 फीसद समय यह 55 फीसद तक बिजली जा सकती है। लेकिन ऐसा एक साथ सभी प्लांट के लिए नहीं कर सकते हैं। आमतौर पर एनटीपीसी से दिल्ली को लगभग 4000 मेगावाट बिजली देता है लेकिन आज की तारीख में उससे आधी बिजली भी नहीं दे पा रहा है।”

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