December 7, 2022

अब जरुरत नहीं एफिडेविट की, मान्य होगा स्वयं सत्यापन

दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव एस के श्रीवास्तव ने 26 अगस्त को दिल्ली सचिवालय में विभागाध्यक्षों की बुलाई उच्चस्तरीय बैठक में सभी प्रधान सचिवों, सचिवों और विभागाध्यक्षों को आदेश दिए कि वे नागरिकों को अपने विभाग से संबंधित प्रदाय सेवा को उपलब्ध कराने में मांगे गए अनावशयक एफिडेविट्स की अनिवार्यता को खत्म करें और उसकी जगह पर लोगों से स्वयं सत्यापित प्रमाण पत्र स्वीकार कर सेवा उपलब्ध करायें। मुख्य सचिव ने दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग की सिफारिश पर सभी विभागाध्यक्षों से उनके द्वारा लोगों को दी जाने वाली सेवाओं की सूची 31 अगस्त 2014 तक मांगकर उनसे उन सेवाओं में आवशयक रूप से मांगे जाने वाले एफिडेविट्स को हटाकर स्वयं सत्यापन को मान्य बनाते हुए उनसे उन सेवाओं की सूची मांगी है। बैठक में दिल्ली सरकार के प्रधान सचिव प्रशासनिक सुधार अरूण बरोका ने दिल्ली सरकार के सभी विभागों द्वारा प्रदत्त सेवाओं और उनमें मांगे जाने वाले हलफनामों की आवशयकता के उन्मूलन और उसके स्थान पर स्वयं सत्यापन को लागू करने के लिए एक विस्तृत प्रारूप प्रस्तुत किया।

मुख्य सचिव ने सभी अधिकारियों को कहा कि सरकार लोगों का प्रतिनिधित्व करती है और यह सरकार की जिम्मेदारी है कि नागरिकों को बिना किसी परेशानी का सामना किए और बेहतर से बेहतर सेवाएं प्रदान करे। लोगों को बिना समय बर्वाद किए, निर्वाध, बिना धन खर्च किए अच्छी सेवाएं प्रदान की जाएगी तो लोग के मन में निश्चित रूप सरकार के कृतज्ञता का भाव उत्पन्न होगा।

श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसी सेवाएं जिनमें हलफनामों की जरूरत वैधानिक आवशयकता नहीं है और लोगों को परेशानी का कारण बनी हुई है। उस आवशयकता को तुरंत समाप्त कर दिया जाना चाहिए और उसके स्थान पर स्वयं सत्यापन को मंजूरी दी जानी चाहिए। जितनी भी घोषणाएं हलफनामों में आवशयक बनायी गई थीं उन्हें हटाकर स्वयं सत्यापन में परिवर्तित कर दिया जाय। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही साथ लोगों को यह बताया जाना जरूरी है कि स्वयं सत्यापन में वे कतई गलत जानकारी नहीं दें और ऐसा करने पर कानूनों के प्रावधानों के अंतर्गत उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 177,193,197,198,199 और 200 के अंतर्गत दंडित किया जा सकता है। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए की वे अपने-अपने विभागों में ऐसी सेवाओं जिनमें हलफनामें की जरूरत को आवशयक करार दिया गया था, उन फार्माे से उस आवशयकता को तुरंत प्रभाव से खत्म कर दिया जाय और नए फार्म निकाले जाएं जिसमें स्वयं सत्यापन को दर्शाया गया हो।

श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसा करने से हम नागरिकों को अच्छी सेवाएं देने के साथ- साथ उन्हें हलफनामे में पैसा खर्च करने, स्टाम्प पेपर खरीदने, नोटरी और कार्रकारी मजिस्ट्रेट के पास चक्कर लगाने, विलेख लेखक को ढूंढने जैसी समस्याओं से निजात दिलायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि जाति प्रमाण पत्र जैसे प्रमाण पत्रों को छात्रों को स्कूल में ही उपलब्ध कराया जा सकता है

श्रीवास्तव ने कहा कि प्रशासनिक सुधार के क्षेत्र में दिल्ली सरकार द्वारा नागरिकों की सेवाओं से संबंधी एक पहल है। हमें अभी बहुत कुछ करना है। श्रीवास्तव ने कहा कि सभी विभागाध्यक्ष इस सुधार को जन-जन तक पहुंचाने के लिए व्यापक प्रचार अभियान चलायें।

विशेष संवाददाता मणि आर्य

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