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अश्वगंधा कोरोना विषाणु संक्रमण को रोकने में पूर्ण सहायक!

अश्वगंधा कोरोना विषाणु संक्रमण को रोकने में पूर्ण सहायक!

अश्वगंधा आयुर्वेद की महत्वपूर्ण औषध। अश्वगंधा तनाव एवं चिंता कम करता है मांस पेशियों को ताक़तवर बनाता है, कैंसर रोकने में सहायक है, ब्लड शुगर को कम करता है ,अश्वगंधा में विथोनान नामक केमिकल के कारण विषाणु संक्रमण को रोकने में पूर्ण सहायक है, आयुष विभाग द्वारा अश्वगंधा, गिलोय ,काली मिर्च,आदि कई औषधि पर पर रिसर्च चल रही है! सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं जहां कोरोनावायरस नेसंपूर्ण विश्व में पैर पसार दिये है, कोविड-19 ने 6माह बीत जाने के बाद भी अभी तक कोई सफलतम चिकित्सा उपलब्ध नहीं हुई है ऐसी स्थिति में आयुर्वेद चिकित्सा की मांग दिनों दिन बढ़ती जा रही है अतः कोरोना की चिकित्सा में पारंपरिक आयुर्वेद का सहारा लेना अत्यंत आवश्यक हो गया है रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में आयुर्वेद सहायक है, आयुर्वेद औषधियों पर रिसर्च चल रही है सुखद परिणाम आ रहे हैं आयुर्वेद के अनुसार अश्वगंधा चूर्ण एवं च्यवनप्राश एक एक चम्मच दिन में दो बार,तथा लौग तुलसी, काली मिर्च, दालचीनी, अदरक, को चाय, दूध, या पानी में उबालकर दिन में 4 से 5 बार पीये नमक के गरारे करें लौग के चूर्ण में मिश्री या शहद मिलाकर लेवे सकारात्मक परिणाम आते हैं आयुर्वेद औषधियों का दुष्परिणाम नहीं है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा पुराना चिकित्सा विज्ञान का देश है आयुर्वेद कहा जाता हैआयुर्वेद औषधियां युक्त काढ़ा जिसके बहुत ही सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है रोग का प्रभाव तेजी सेशरीर पर होता है इसका संक्रमण मुख्य रूप से मुख एवं नाक के द्वारा होता है इसलिए मास्क पहनने की सलाह दी जा रही है, आयुर्वेद नस्य (नाक) विधि में तेल का उपयोग सरसों का तेल, षडविदु तेल, अणु तेल, अपनाई जावे, यह तेल एक बायोलॉजिकल बैरियर यानी नाक और मुंह की श्लेष्मा झिल्ली की सतह के ऊपर एक आंतरिक सुरक्षा कवच का काम करती है वायरस को जाने से रोकती है, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी आयुर्वेद चिकित्सा को पूर्ण चिकित्सा का दर्जा दिया हैभारतीय आयुर्वेद के बिना अधूरी है विश्व स्वास्थ संगठन की परिकल्पना पूर्ण स्वास्थ्य की प्राप्ति पूर्ण स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है समृद्ध राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है जब विरासत और संस्कृति को आगे बढ़ाया जाए ऐसी ही एक विरासत है आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में डब्ल्यूएचओ का उद्देश्य तब तक पूरा नहीं हो सकता जब तक प्राचीन चिकित्सा को इसमें शामिल नहीं किया जाय भारत जैसे विशाल देश में यह असंभव भी है जहां प्रत्येक घर में आयुर्वेद मौजूद है आयुर्वेद हजारों वर्षों से देश की मुख्य चिकित्सा पद्धति रही है कुछ बरसों से आयुर्वेद की जितनी अपेक्षा की गई है रोगों को हराने में और इलाज में उतना ही पीछे चले गए है, आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के सिद्धांत को सैद्धांतिक रूप से माना गया है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुर्वेद औषधि काढ़ा पीने की सलाह दी है नियमित 30 मिनट तक व्यायाम करना रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण कारगर है आयुष विभाग द्वारा सभी जगह आयुर्वेद औषधि युक्त काढ़ा दिया जा रहा है अधिक से अधिक लाभान्वित हो रोग प्रतिरोधक क्षमता जितनी अधिक होगी रोग का प्रभाव उतना ही कम होगा!

डॉ घनश्याम व्यास
पूर्व अतिरिक्त निदेशक आयुर्वेद विभाग राजस्थान

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