November 26, 2022

उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने भूकंप से निपटने के लिए की तैयारियाँ; 115 स्कूलों, संस्थानों और हाउसिंग सोसाइटियों को जारी किए गए नोटिस

दिल्ली में भूकंप से निपटने के मद्देनज़र उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने 115 स्कूलों, संस्थानों और हाउसिंग सोसाइटियों को नोटिस जारी किए। इसके अंतर्गत कहा गया है कि भवन की भूकंपीय स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए भवनों की स्ट्रक्चर ऑडिट रिपोर्ट के साथ मौजूदा बिल्डिंग प्लान जमा कराना होगा।
उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा ये नोटिस माननीय उच्च न्यायालय, दिल्ली के निर्देशों और थोड़े समय में कई भूकंपों की घटना को ध्यान में रखते हुए जारी किए गए हैं। 30 दिनों के अंदर उत्तरी निगम के संबंधित क्षेत्रीय कार्यकारी अभियंता (भ) को संरचनात्मक ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। रिपोर्ट मिलने के पश्चात यदि आवश्यक हुआ तो 6 महीने के अंदर पंजीकृत स्ट्रक्चर इंजीनियर के निरीक्षण में भवन का पुनः संयोजन एवं आवश्यक मरम्मत का कार्य करवाया जाएगा। समय पर रिपोर्ट जमा न करवाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अभियांत्रिक विभाग ने बताया कि सूचीबद्ध स्ट्रक्चर इंजीनियर की सूची निगम की वेबसाइ पर उपलब्ध है और इसके अलावा जाँच रिपोर्ट इंजीनियरिंग संस्थान जैसे कि आईआईटी दिल्ली, आईपी युनिवर्सिटी या कोई अन्य संस्थान, जिसे ए.आई.सी.टी.ई. द्वारा मान्यता प्राप्त हो, द्वारा भी इसकी जाँच करवाई जा सकती है।
दिल्ली सरकार द्वारा अधिसूचित कार्य योजना के अनुसार, पहले चरण में उच्च जोखिम वाली सरकारी व निजी इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा दो से तीन साल की समय सीमा के भीतर पूरी की जाएगी और उसके बाद मध्यम और निम्न जोखिम वाली इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा पूरी की जाएगी । दूसरे चरण में, कम जोखिम क्षेत्र में आने वाली इमारत के साथ-साथ अनधिकृत / अनधिकृत नियमित / गाँव की अबादियों / पुन: बसी कॉलोनियों / विशेष क्षेत्रों में आने वाले भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा पूरी की जाएगी ।
उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने पहले चरण में 25 ऐसे निगम भवनों व अन्य सरकारी भवनों की सूची तैयार की है जिनकी स्ट्रक्चरल ऑडिट की जानी है। इस कार्य के लिए आई.आई.टी दिल्ली, दिल्ली टैक्नीकल युनिवर्सिटी, एन.सी.सी.बी.एम. आदि जैसे संस्थानों से संपर्क किया गया है ताकि इन भवनों की जाँच हो सके।
तीनों नगर निगमों ने सभी भवनों से संरचनात्मक सुरक्षा प्रमाणन प्राप्त करने के लिए छह महीने की समय सीमा तय की है, जिसमें पुराने भवनों पर जोर दिया जा रहा है जो दिल्ली के उप-कानूनों में भूकंपीय प्रावधानों को शामिल किए जाने से पहले सामने आए हैं।

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