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उन्नाव कांड: सर्वोच्च न्यायालय को ‘योगी’ और उ.प्र. ‘पुलिस’ पर भरोशा नहीं, मामला दिल्ली स्थांनातरित

उन्नाव कांड: सर्वोच्च न्यायालय को ‘योगी’ और उ.प्र. ‘पुलिस’ पर भरोशा नहीं, मामला दिल्ली स्थांनातरित

सर्वोच्च न्यायालय ने उन्नाव कांड को लेकर आज उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस के मुंह पर जोरदार तमाचा मारते हुए पूरे हादसे को उत्तर प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरण करने का आदेश दे दिया है। अब दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में जिला जज धर्मेश शर्मा सुनवाई करेंगे। इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस के मुखिया पर भी गंभीर सवाल उठता है। याद दिला दें हत्या और बलात्कार का आरोपी विधायक कुलदीप सेंगर को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ऐसे अपराधी को संवाददाता सम्मेलन में माननीय कहकर संबोधित करते हैं जिसकी आलोचना भी हुई।

उन्नाव कांड में पुलिस ने जिस तरह से कार्रवाई की है और आज तक जो कुछ हुआ है और उसमें पुलिस की जो भूमिका हुई है उसके लिए प्रदेश के पुलिस मुखिया भी जिम्मेदार हैं उससे नकारा नहीं जा सकता। उन्नाव रेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश देते हुए इससे जुड़े सभी पांचों मामलों को दिल्ली ट्रांसफर कर दिया है वहीं मामले की रोजाना सुनवाई करने के भी आदेश दिए गए हैं। हम बता दें कि रविवार को बलात्कार पीड़िता की कार में ट्रक ने टक्कर मार दी थी। कार सवार दो महिलाओं की इस दुर्घटना में मौत हो गई थी जबकि बलात्कार पीड़िता और उसका वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दिल्ली महिला आयोग की प्रमुख स्वाति मालीवाल ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से बुधवार को मुलाकात की और उन्नाव बलात्कार पीड़िता को इलाज के लिए हवाई मार्ग से दिल्ली लाने की मांग की। रायबरेली सड़क हादसे में बुरी तरह से घायल उन्नाव बलात्कार पीड़िता और उसके वकील की हालत गुरुवार को पांचवे दिन भी यथावत बनी हुई है।

पीड़िता अब भी वेंटीलेटर पर है जबकि वकील को कुछ देर के लिये वेंटीलेटर से हटाकर देखा गया। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी ने ऐसी किसी भी बात से इंकार किया कि पीड़िता को बेहतर इलाज के लिये एयर लिफ्ट किया जा रहा है।
फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय ने कड़ा रुख रखते हुए उस ट्रक-कार दुर्घटना को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से सात दिनों में जांच पूरी करने को कहा है, जिसकी की वजह से पीड़िता अस्पताल में अपने जीवन की लड़ाई लड़ रही है। अदालत पीड़िता व उसके परिवार को मुआवजा दिलाए जाने और उनकी सुरक्षा के बारे में भी फैसला किया।

पीड़िता ने अदालत को पत्र लिखकर सुरक्षा प्रदान करने की मांग की थी। इसके संबंध में अदालत ने पत्र समय पर नहीं दिए जाने पर रजिस्ट्री पर नाराजगी व्यक्त की। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने पीड़िता को 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। मुआवजा यूपी सरकार देगी। 45 दिन में सुनवाई पूरी करने का भी सुप्रीम कोर्ट का आदेश है। पीड़िता, उसके परिवार और उसके वकील की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआरपीएफ को दी गई है. हादसे की शिकार हुई पीड़िता और उसके वकील का लखनऊ के अस्पताल में उपचार चल रहा है। उनकी कार को रविवार को एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी। उन्नाव गैंगरेप मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई रंजन गोगोई ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि, ‘आपको कितना समय चाहिए (रेप पीड़िता और अन्य के सड़क हादसे की जांच के लिए)’ इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा, ‘एक महीना’. सीजेआई ने जवाब दिया, ‘एक महीना? नहीं, सात दिन में जांच कीजिए।’

उन्नाव गैंगरेप के आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को ने पार्टी से निकाल दिया है कुलदीप सिंह सेंगर पार्टी से पहले ही निलंबित चल रहे थे। रायबरेली में हुए हादसे की शिकार उन्नाव बलात्कार पीड़िता की सुरक्षा में लगे 3 पुलिसवाले को निलंबित कर दिया गया है। ड्यूटी में लापरवाही बरतने को लेकर कार्रवाई की गई है। सीबीआई ने उन्नाव बलात्कार पीड़िता के सड़क दुर्घटना मामले में भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और नौ अन्य के खिलाफ हत्या के आरोपों के तहत मामला दर्ज किया है।

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