December 9, 2022

एक आंकड़े के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष खो जाते हैं 44000 बच्चे …….

परिवार से बिछड़े हुए और खोए बच्चों को खोज निकालने के लिए दिल्ली सरकार का महिला एवं बाल विकास विभाग और दिल्ली पुलिस मिलकर इस दिशा में एक नई पहल कर रहे हैं। जहां एक ओर लापता बच्चों के मां-बाप व परिजनों द्वारा लिखाई शिकायत के आधार पर उन बच्चों को ढूढने और खोज निकालने के लिए पुलिस कार्य कर रही होती है, वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग विभिन्न स्थानों से प्राप्त ऐसे बच्चों के बारे में उनके शारीरिक विवरण एवं फोटो इत्यादि उपलब्ध करवाकर पुलिस के द्वारा ढूंढवाकर परिवार से मिलाने का कार्य करता है। इस प्रकार दोनों ही विभाग इस महत्वपूर्ण कार्य अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं।

दिल्ली सरकार की समाज कल्याण महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रधान सचिव सतबीर बेदी ने बताया कि विभाग ने बिछड़े व खोए बच्चे को खोजने और ढूंढने के लिए बेहतर कार्य योजना तैयार की है और इसके साथ ही साथ अनेक बैठकें आयोजित कर इसके सामाजिक, नैतिक और कानूनी पक्षों पर विचार करते हुए ठोस योजना तैयार की है जिसके अंतर्गत परिवार से बिछड़े और खोए बच्चों को ढूढने के लिए समय सीमा तय की है।

बेदी ने कहा कि इसके साथ ही साथ बच्चों को ढूंढ निकालने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार कर तीन कार्यदलों का भी गठन किया है। ये तीनों कार्यदल योजना विवरण कार्य के लिए बनाए गए हैं, पहला परिवार से बिछड़े बच्चों को खोजने के लिए पुलिस विभाग से मिलकर एक नेटवर्क तैयार किया गया है । दूसरा बाल कल्याण समिति द्वारा उठाए जाने वाले कदम ।तीसरा विभाग द्वारा चलाए जा रहे संस्थानों के कार्य एवं व्यय, बच्चों के सुधार हेतु आकलन किया जाता है । तीनों कार्यदल अपने प्रगति विवरण व अन्य सुझाव निदेशक, महिला बाल विकास विभाग को प्रस्तुत करेंगे । इस विषय पर परिचालन दक्षता के लिए राज्य स्तर के प्रतिनिधियों का एक सम्मेलन आयोजित भी किया जाना तय हुआ है । इस कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए विशेष निर्देश भी जारी किए गए हैं।

सतबीर बेदी ने आगे बताया कि खोए-पाए बच्चों के मुद्दे पर पुलिस एवं महिला एवं बाल विकास विभाग बराबर बैठकें आयोजित कर कार्य की प्रगति की समीक्षा समय-समय पर कर रहा है। उन्होंने (स्वयं) अपने कार्यलय में 26 अगस्त को संयुक्त पुलिस आयुक्त रोबिन हिब्बू के साथ बैठक की और कार्ययोजना की प्रगति की समीक्षा की और 28 अगस्त को उन्होंने इस विषय मेंं पुलिस आयुक्त से भी भेंट की और उनसे इस विषय में गहन चर्चा की।

एक आंकड़े के अनुसार प्रत्येक 8 मिनट में बच्चा खो जाता है । 40% बच्चे खोने के बाद प्राप्त नहीं होते है इसके अलावा प्रत्येक वर्ष 44 हजार बच्चे भारत में खो जाते हैं । सबसे गंभीर बात ये है की खोए हुए बच्चों के मामले में दिल्ली का स्थान प्रथम है ।

वैशाली

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