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एक बार फिर ज़िंदा हुआ मृत घोषित आदमी

एक बार फिर ज़िंदा हुआ मृत घोषित आदमी

बाहरी दिल्ली में एक बार फिर ज़िंदा हुआ मृत घोषित आदमी..। ये चौंका देने वाली खबर है नरेला की जहाँ MCD ने जारी कर दिया एक ज़िंदा आदमी का मृत्यु प्रमाण पत्र यानि की डेथ सर्टिफिकेट वो भी तीन साल पहले। अभी कुछ दिन पहले जब ये आदमी खुद अपना डेथ सर्टिफिकेट लेकर पहुँचा तो सब हैरान रह गए।

ये आदमी तीन साल पहले मृत घोषित कर दिया गया था हकीकत में वो आदमी जिंदा है। जी हाँ ये कहानी थोड़ी फिल्मी लग सकती है लेकिन हकीकत में ऐसा हुआ है। दरअसल बाहरी दिल्ली नरेला के रहने वाले जय प्रकाश की मृत्यु तो MCD नरेला ज़ोन द्वारा इशू किये गए डेथ सर्टिफिकेट/ मृत्यु प्रमाण पत्र में 2012 में ही हो चुकी है तो सवाल ये उठता है की ये शख्स आख़िर ज़िंदा कैसे? या फिर यूँ कहें की अगर ये शख्स ज़िंदा है तो फिर इसका डेथ सर्टिफिकेट कैसे जारी कर दिया गया।
पूरा मामला MCD में व्यापक स्तर पर चल रहे सर्टिफिकेट सिंडिकेट की ओर इशारा करता है जिसके जरिये महज कुछ हज़ार रुपये खर्च कर कोई भी सर्टिफिकेट बनाए जाने के आरोप दिल्ली नगर निग़म पर लगते रहते हैं।

जय प्रकाश का कहना है की मैं ज़िंदा हूँ लेकिन MCD ने मेरा डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया.. ये मेरी सम्पत्ती हथियाने की साजिश है जिसमें पुलिस वाले, MCD और मेरे बेटे भी शामिल हैं…

जय प्रकाश के मुताबिक अभी छे महीने पहले ही उनको इस बात का पता चला जिसके बाद वो नरेला थाने पहुँचे लेकिन बजाय मामले की गंभीरता को समझते हुए इस पर शिकायत दर्ज़ कर जाँच करने के उनको थाने से जाने के लिए कहा गया और पुलिस से उनको कोई भी मदद नहीं मिली। MCD का रवैया भी कुछ ऐसा ही रहा। आखिरकार जय प्रकाश को कोर्ट की शरण लेनी पड़ी जिसके बाद मामले में FIR दर्ज़ हुई है। हालाँकि शिकायतकर्ता का ये आरोप है की मामले में आवश्यक गति से करवाई नहीं की जा रही है और दोषी खुलेआम घूम रहे हैं। जबकि ज़िंदा आदमी के डेथ सर्टिफिकेट पर सब रजिस्ट्रार के मुहर और दस्तख़त भी हैं । ऐसी स्थिति में इस फर्ज़ीवाड़े के लिए इस MCD अधिकारी को भी क्यों जिम्मेदार नहीं ठहराया गया… इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है।

जय प्रकाश के मुताबिक जो अधिकारी दोषी हैं वो आराम से नौकरी कर रहे हैं और मैं दर दर भटक रहा हूँ

जब मीडिया के जरिये मामला NDMC स्टैंडिंग कमिटी के चेयरमैन तक पहुँचा तो उन्होंने भी जाँच के आदेश देने की बात कही और माना की इस तरह के मामले में सम्बंधित अधिकारी पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।

इस मामले में मोहन भारद्वाज ,( चेयरमैन स्टैंडिंग कमिटी) का कहना है की ये फर्ज़ीवाडा जिसने भी किया है उसकी जाँच करवाई जायेगी और दोषियों को बख्शा नहीं जायेगा।

सूत्रों की माने तो अक्सर सुर्ख़ियो में रहने वाली MCD के ज़रिये बनने वाले सभी तरह के सर्टिफिकेट बहुत आसानी से बनवाये जा सकते हैं वो भी बिना किसी छानबीन या झंझट के। ज़िंदा व्यक्ति का डेथ सर्टिफिकेट इस बात का प्रमाण है की सर्टिफिकेट बनने की प्रक्रिया में फर्जीवाडा किस कदर फैला हुआ है। अब देखने वाली बात ये होगी की MCD के आला अधिकारी इस बात को कितनी गंभीरता से लेते हैं और आगे निगम के द्वारा पूरे मामले में सम्बंधित अधिकारी यानि सब रजिस्ट्रार पर क्या कार्रवाई की जाती है या कार्यवाही होती भी है ?

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