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ओटीपी शेयर करते ही, हो सकती है धोखाधड़ी। साइबर अपराध के प्रति सजग रहें, सुरक्षित रहें: एसपी वसीम अकरम

ओटीपी शेयर करते ही, हो सकती है धोखाधड़ी। साइबर अपराध के प्रति सजग रहें, सुरक्षित रहें: एसपी वसीम अकरम

झज्जर

आधुनिकता के दौर में आज के समय में काम तो तेजी से होने लगे हैं। तेजी के साथ साथ कुछ छोटी-छोटी लापरवाही होने के कारण कुछ व्यक्ति साइबर जालसाजों के चंगुल में फंस कर धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं। ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार होकर अपना पैसा गवा देते हैं। इसलिए किसी भी तरह का ऑनलाइन लेनदेन करते समय सतर्क व सावधान रहें। झज्जर पुलिस द्वारा आमजन को साइबर अपराध के प्रति सजग रहने व ऑनलाइन लेनदेन करते समय सावधानी रखने का आह्वान किया गया है। पुलिस अधीक्षक झज्जर श्री वसीम अकरम आईपीएस ने जानकारी देते हुए बताया कि आधुनिक तकनीक के चलते साइबर अपराध भी घटित हो रहें है। साइबर क्रिमनल झांसा देकर साइबर अपराध से अनभिज्ञ व्यक्तियों से उनकी पर्सनल जानकारी पुछकर उनके साथ ठगी की वारदात को अन्जाम देते हैं। साइबर अपराध से बचने के लिए खुद को जागरुक व सावधान रहने की आवश्यकता है। अगर कोई व्यक्ति स्वयं जागरुक है, तो उसके साथ कोई साइबर अपराध भी नही होगा। साइबर क्रिमनल अलग तरीके-2 अपनाकर लोगो को लॉटरी, ऑफर या अन्य किसी प्रकार का लालच देकर उनके साथ ठगी करने की फिराक में रहते हैं। किसी भी प्रकार के साइबर अपराध से बचने के लिए अपनी निजी जानकारी किसी के साथ कभी शेयर ना करें। ओटीपी अथवा वन टाईम पासवर्ड जो केवल निजी जानकारी के लिए होता है। अगर वह किसी अन्जान व्यक्ति के साथ शेयर कर दिया तो शेयर करने वाले व्यक्ति का बैंक खाता खाली हो सकता है। इसलिए मोबाईल पर प्राप्त कोई भी ओटीपी किसी भी अन्जान व्यक्ति के साथ शेयर ना करें। चाहे वह व्यक्ति आपके लिए या आपके भले के लिए कोई कार्य कर रहा हो। क्योकि साइबर अपराधी, पीड़ित व्यक्ति को झांसा देकर विश्वास में लेकर ओटीपी पुछता है। ओटीपी शेयर करते ही वह व्यक्ति ठगी का शिकार हो जाता है। इसलिए अपना बैंक खाता, ओटीपी., क्रेडिट व डेबिड कार्ड या अन्य किसी भी प्रकार की निजी जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति से शेयर ना करें। इसी प्रकार से अनजान अथवा अज्ञात लिंक इत्यादि पर भी क्लिक ना करें। ना ही किसी के कहनें पर अपनें फोन में कोई साफ्टवेयर या ऐप इत्यादि इंस्टाल करें।

ओटीपी का प्रयोग बैंकिग, ऑनलाइन शॉपिंग, सोशल मीडिया, पासवर्ड भूलने पर उसे रिकवर करने के लिए, आधार कार्ड से लिंक करनें, सिम कार्ड अप़डेट, नया सिम कार्ड खरीदते समय ओटीपी की जरुरत पडती है। अगर आपनें अपना ओटीपी किसी अन्जान व्यक्ति के साथ शेयर कर दिया तो आप साइबर ठगी का शिकार हो सकते हैं। इसलिए सजग रहें, कोई भी ओटीपी या किसी लिंक पर क्लिक करनें से बचें। अगर आपके साथ किसी प्रकार का साइबर अपराध घटित हो जाता है तो तुरन्त राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाईन नम्बर 1930 व साइबर अपराध पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करवायें। उपरोक्त हेल्पलाइन नंबर अथवा पोर्टल पर जितनी जल्दी शिकायत दर्ज की जाएगी, उतनी ही जल्दी ठगे गए पैसों के रिकवर होने की संभावना बढ़ जाती है।

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