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किडनी में स्टोन का बनना एवं उसके बचाव तथा उपचार

किडनी में स्टोन का बनना एवं उसके बचाव तथा उपचार

पहला कैल्शियम आक्सेलेट दूसरा कैलशियम फास्फेट तीसरा स्टूवाइट चौथा यूरिक एसिड एव सिस्टीन इनमें से सबसे कॉमन कैल्शियम ऑक्सलेट होता है। जब बाड़ी में स्टोन बनना शुरू होता है शुरुआत में ही न्यूक्लिेशन के कारण छोटे-छोटे कणों आपस में जुड़ने लगते हैं पथरी की समस्या सबसे अधिक डाइट की वजह से होती है हालांकि पानी कम मात्रा में पीने पीना भी पथरी की बीमारी मुख्य कारण माना जाता है अगर डाइट में बीज वाली चीजों का सेवन करते हैं तो पथरी की बीमारी हो सकती है मूत्र करते समय दर्द होना यह पथरी रोग होने का सामान्य लक्षण है व्यक्ति के मूत्र करते समय काफी दर्द होता है यह दर्द मूत्र समाप्त होने के पूर्व होता है बार-बार मूत्र आना यदि किसी को बार-बार पेशाब करने जाना पड़ता है तो उसे किडनी में स्टोन होने का अंदेशा रहता है

गुर्दे में पथरी बनने का कारण

इसका कोई निश्चित कारण नहीं है पथरी अधिकतर किडनी के फिल्टर मेकैनिज्म में खराबी आने से होती है इससे यूरिन में कुछ रसायन अधिक हो जाते हैं जो जमा होकर पथरी का रूप ले लेते हैं किडनी के अलावा यह मूत्र मार्ग के किसी भी भाग जैसे किडनी मूत्र वाहिनी या मूत्राशय पर बुरा असर डालते हैं

पथरी क्या है

पेशाब में कैल्शियम ऑक्जलेट या अन्य क्षारकणो (क्रिस्टल्स) एक दूसरे से मिलने से कुछ समय बाद धीरे-धीरे मूत्र मार्ग में कठोर पदार्थ बनने लगते हैं जिसे पथरी के नाम से जाना जाता है मूत्र मार्ग में होने वाली पथरी अलग-अलग लंबाई और विभिन्न आकार की होती है यह रेत के कण जितनी छोटी या गेंद की तरह बड़ी भी हो जाती है कुछ पथरी गोल या अंडाकार और बाहर से चिकनी होती है इस प्रकार की पथरी से कम दर्द होता है और सरलता से प्राकृतिक रूप से पेशाब के साथ बाहर निकल जाती है कुछ पथरी खुरदरी होती है जिससे बहुत ज्यादा दर्द होता है वह सरलता से पेशाब के साथ बाहर नहीं निकलती है पथरी मुख्यतः किडनी मूत्र वाहिनी और मूत्राशय में देखी जाती है ज्यादातर लोगों के पेशाब में कुछ खास रासायनिक पदार्थ क्षार के कण को एक दूसरे के साथ मिलने से रोकता है जिस से पथरी नहीं बनती है मूत्र मार्ग की पथरी पेट में असहनीय दर्द का मुख्य कारण है पानी कम पीने की आदत वंशानुगत पथरी होने की तासीर बार-बार मूत्र मार्ग में संक्रमण होना मूत्र मार्ग में अवरोध एवं विटामिन सी या कैल्शियम वाली दवाइयों का अधिक सेवन करने से तथा लंबे समय तक सैया ग्रस्त रहना पथरी के मुख्य लक्षण है सामान्यतया पथरी 30 से 40 वर्ष की उम्र में महिलाओं की तुलना में पुरुषों में 3 से 4 गुना अधिक देखी जाती है पथरी दर्द के विशिष्ट लक्षण पथरी का दर्द पथरी के स्थान आकार प्रकार की लंबाई चौड़ाई पर आधारित है पथरी का दर्द अचानक शुरू होता है इस दर्द में अत्यधिक परेशानी होती है पथरी का दर्द कमर से शुरू होकर पेडू तक जाता है
किडनी का स्टोन कैसे निकाले
स्टोन होने की हालत में कम पानी पीना दर्द और तकलीफ का कारण बन सकता है पथरी का रोग बहुत ही मरीजों में दिखाई देता है यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण किडनी का रोग है पथरी के कारण असहनीय पीड़ा पेशाब में संक्रमण और किडनी को नुकसान हो सकता है सोनोग्राफी या पेट के एक्सरे की मदद से किया जाता है निदान 50% मरीजों में पथरी का आकार छोटा होता है जो प्राकृतिक रूप से 3 से 6 सप्ताह में अपने आप पेशाब के साथ निकल जाता है ज्यादा पानी पीने की सलाह दी जाती है 5 लीटर से 12 से 14 गिलास अधिक मात्रा में प्रतिदिन पानी पीना चाहिए पेशाब पीला कम पानी पीने का द्योतक है नारियल का पानी जौ का पानी पतला शरबत मट्ठा बिना नमक वाला सोडा पीना चाहिए आयुर्वेद मतानुसार टेबलेट सिस्टम सिरप नीरी का सेवन पथरी के निवारण में बहुत ही उपयोगी है चिकित्सक की सलाह के अनुसार निदान कराएं
डॉ घनश्याम व्यास
पूर्व अतिरिक्त निदेशक
आयुर्वेद विभाग राजस्थान

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