December 2, 2022

खोए बच्चों को पता लगाने के लिए आॅपरेशन ’खोज‘ की शुरुआत:दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर)

दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) ने दिल्ली में खोए बच्चों का पता लगाने के लिए आॅपरेशन ‘खोज’ कार्यक्रम की शुरुआत की है। आयोग के अध्यक्ष अरूण माथुर ने बताया कि दिल्ली में दिनों-दिन बच्चों के लापता होने की खबरों को ध्यान में रखते हुए आयोग ने आॅपरेशन ‘खोज’ की पहल की है। आयोग के सदस्य शशाक शेखर की देखरेख में इस कार्यक्रम को चलाया जा रहा है। माथुर ने बताया कि आयोग खोए बच्चों को ढूंढने और पता लगाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए आयोग ने खोए बच्चों का पता लगाने के लिए बच्चे के फोटोग्राफ्स सहित उसकी जानकारी का विवरण सभी श्रोतों को भेजने के साथ-साथ बाल गृहों के नेटवर्क को भेजने का प्लान बनाया है। माथुर ने बताया कि दिल्ली में 45 बाल गृहों का एक नेटवर्क बनाया गया है। बच्चे के लापता होते ही उसकी तस्वीर सहित उसका विवरण सभी बाल गृहों में नेटवर्क के द्वारा प्रसारित कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि आयोग खोए बच्चों का पता लगाकर उनकी देखरेख और उनके पुनर्वास की व्यवस्था करेगा।माथुर ने बताया कि खोए बच्चे की जानकारी ईमेल आईडी missingchild.dcpcr@gmail.com के माध्यम से मांगी जाएगी और उसका जवाब भी इसी आईडी से दिया जाएगा।

माथुर ने बताया कि बाल अधिकार संरक्षण आयोग बाल गृहों को नेटवर्क के दायरे को बढ़ाने के लिए तैयार है और उसके लिए बाल गृहों के प्रबंधकों, बाल गृहों के माँ और पिता आदि को संवेदनशील बनाने के लिए लगातार बैठकें आयोजित कर रहा है। उन्होंने कहा कि आयोग को आ”ाा है कि इन प्रयासों से खोए हुए बच्चों को ढूंढ निकालने में मदद मिलेगी और बच्चों के खोने की घटना में कमी आएगी।

माथुर ने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार 2008 में 6268 बच्चे थे वहीं यह संख्या 2009, 2010, 2011, 2012 और 2013 में क्रमश: 5946, 5091, 5111, 5248 और 7235 थी जो हम सभी के लिए चिंता का विषय है।

माथुर ने बताया कि आयोग खोए हुए बच्चे को खोजने के लिए व्यक्तिगत केस के तौर पर पूरी गंभीरता से लेता है। आयोग बच्चा जहां से खोता है उस थाने को नोटिस जारी कर उससे इस बावद पूरी रिपोर्ट मांगता है। यह देखा गया है कि नोटिस मिलते ही संबंधित थाना इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट आयोग को निश्चित समय में उपलब्ध करा देता है लेकिन जब इस प्रकार की रिपोर्ट एसीपी के द्वारा भेजी जाती है तो वे आयोग को देरी से मिलती है जो चिंता का विषय है।

इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा 2010 में बाल श्रम उन्मूलन के लिए बनायी गयी कार्य योजना को दिल्ली में दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग पूरी तरह से कार्यान्वित करने के लिए निरंतर निगरानी कर रहा है और माननीय उच्च न्यायालय के निर्दे”ाानुसार पूरी तरह से निगरानी कर रहा है।

माथुर ने बताया कि दिल्ली में बाल श्रम पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग कार्य योजना के अंतर्गत समय-समय पर अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं के साथ बैठकें, चर्चा और सुझाव आयोजित कर उचित पटल पर समन्वय स्थापित करने का काम कर रहा है। आयोग, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और इसके सदस्यों, बिहार, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, झारखंड, उडि़सा और छत्तीसगढ़ आदि के प्रतिनिधियों के साथ निरंतर बैठकें व चर्चाएं आयोजित कर बाल श्रम उन्मूलन के विषय में नीतिगत फैसले लेता आ रहा है। यही नहीं आयोग बाल कल्याण समितियों के सदस्यों, जिलाधीशो और उपजिलाधीशो के साथ-साथ बच्चों के अधिकारों के लिए कार्य कर रही चाइल्ड लाइन इंडिया फाउंडेशन, प्रयास और बचपन बचाओ आन्दोलन जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर समय-समय पर बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में संवेदनशीलता का भाव पैदा करने के लिए तालमेल बैठाने का कार्य भी बखूबी कर रहा है।

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