December 3, 2022

गर्भधारण एवं प्रसव पूर्व निदान कार्यशाला सम्पन्न भारतीय संस्कृति में नारियां सदैव पूजी गई- कलेक्टर

उमरिया – जहां नारियों की पूजा होती है वहां देवताओं का वास होता है। इसके बावजूद भी नारियों को समाज में जो सम्मान मिलना चाहिए वह नही मिल रहा है यही कारण है कि आज 1 हजार पुरूषों पर 944 नारियां है, जो सभ्य एवं सुसज्जित समाज के लिए कलंक है। यह बात जिला चिकित्सालय मे आयोजित गर्भधारण एवं प्रसव पूर्व निदान कार्यशाला में कलेक्टर श्री कृष्ण गोपाल तिवारी ने कही। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक पी एस उइके, सीएमएचओ डा0 एम पी तिवारी, अधिवक्ता पुष्पराज सिंह, कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास ललित डेहरिया, श्रीमती आभा निगम, श्रीमती रचना गौतम, एड0 लाल के के सिंह, राम चरित्र मिश्रा, डा कौड़िया, डां चौधरी, डा कानस्कर, डीपीएम जे पी विश्वकर्मा, डा रश्मि धनंजय, चिकित्सक एवं मेडिकल स्टाफ , पत्रकारगण सहित अन्य प्रबुद्ध जन उपस्थित थे।

कलेक्टर ने कहा कि देश में 3500 साल पहले नारियों को पूजा जाता रहा है और आज हमें भ्रूण हत्या जैसे जघण्य अपराध के लिए जन जागरूकता हेतु कार्यशालाएं आयोजित करनी पड़ रही है। जो गर्व नही शर्म की बात है। उन्होंने कहा कि पुत्र की भांति पुत्रियों को परिवार में प्यार एवं दुलार मिले । बेटे द्वारा वंश चलाने की अवधारणा को समाप्त करनेे के लिए संवेदनशील होकर बेटियों का सम्मान समाज मे करना होगा। कलेक्टर ने कहा कि आज हमे संकल्प लेना होगा कि भ्रूण हत्या जैसे जघण्य अपराध को जिले मे नही होने देगे। इसमें पत्रकारों की महती भूमिका होगी।
कलेक्टर ने कहा कि सास की पुरानी सोच बेटी नही बेटा चाहिए को बदलनी होगी और देश के केरल , प्रांत जैसे लिंगानुपात 1 हजार पर 1 हजार के आकड़े को प्राप्त करना होगा।

इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक पी एस उइके ने कहा कि बेटियां अनमोल रत्न है उनके जन्म मे घर में खुशियों की बौछार हो , मां बाप के चेहरे मे मुस्कुराहट हो तो निश्चित रूप से भ्रूण हत्या में कमीं आयेगी। उन्होंने कहा कि बेटी नही तो बहूं कहंा से लाओगे इस अवधारणा के तहत बेटियों का बेटों के समान लालन पालन करें और परिवार में खुशियों का सागर भरे। बेटियां जहां एक ओर परिवार की नाक है वही देश की शान भी है। भ्रूण हत्या रोकने के लिए एक्ट बनाया गया है जिसमें पांच साल की सजा एवं 50 हजार रूपये तक का जुर्माना होगा इसलिए ऐसी स्थिति नही आने दें ।
कार्यशाला में स्त्री रोग विशेषज्ञ डा रश्मि धनंजय , श्रीमती आभा निगम, श्रीमती रचना गौतम, पुष्पराज सिंह अधिवक्ता ने भी गर्भधारण एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम के साथ साथ समाज में बेटियों को बेटे के समान मानने पर जोर दिया।

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