December 2, 2022

चाइनीज राखी लाने से डर रहे है दुकानदार

अबकी बार रक्षाबन्धन के त्यौहार पर सजेगी भारतीय राखी .. चाइनीज राखी लाने से डर रहे है दुकानदार ..अधिकतर बहने भी कह रही है की अबकी बार वे भारतीय कलावा या राखी भाइयो को बांधेगी .. वजह है सोसल साइट्स … आजकल WhtsApp , Facebook0 , Hike .. ट्विटर .. आदि पर कुछ मसेज लगातार एक सप्ताह से आ रहे है जिनमे स्वदेशी पर जोर दिया गया है और मसेज में लिखा है की चाइना भारत की सीमा का उल्घंन कर रहा है और अपने प्रोडेकट भी भारत में ही बेच रहा है .. राखी पर करोड़ो की चाइनीज राखिया बाजार में आई है इसलिए यदि अबकी बार चाइनीज राखी बहने न खरीदे और भाई इस मसेज को हर बहन तक पहुंचाए .ये चाइना को सबक होगा .. आगे किसी भी प्रोडक्ट को भारतीय बाजार में उतारने से पहले दस बार सोचेगा .. ये चाइना को करारा जवाब होगा .. दिल्ली के नत्थूपूरा व् संतनगर इलाके में अधिकतर दुकानदार चाइनीज राखी नहीं लाये और इनका कहना है की अबकी बार ग्राहक इंडियन राखी ही मांग रहे है ..चाइना में बनी करोड़ो की राखी जिन भारतीय व्यापारियों ने खरीदी है वे सब चिंतित …

ये है उत्तरी पश्चिमी दिल्ली का नत्थूपूरा का बुध बाजार .. यहाँ राखी के त्यौहार से एक सप्ताह पहले ही राखी की दुकाने सज गई .. तरह तरह की राखिया सजी है .. पर ये सभी राखिया इंडियन है .. पिछले रक्षाबंधन पर चाइनीज राखिया ही ज्यादा थी पर अबकी बार ये दुकानदार चाइनीज राखिया नहीं लाये .. अबकी बार रक्षाबन्धन पर अभी से बहने अपने भाइयो की कलाई पर बाँधने के लिए इंडियन कलावा ..या इंडियन राखी ही मांग रही है .. वजह है सोसल साइट्स …दरअसल आजकल WhtsApp , fecebok , Hike .. ट्विटर .. आदि पर मसेज फैले है की बहने भाइयो की कलाई पर इंडियन राखी बांधे .. चाइनीज नहीं …इससे दुकानदार डर गये कही चाइनीज राखी कम सेल हो और उनका सामान रूक न जाए और घाटे का सौदा हो जाए इस कारण चाइनीज राखी लाने से ही परहेज कर गये …

अब बहने भी खुद के मोबाइल पर जिनके पास खुद इंटरनेट वाला मोबाइल नहीं वे बहने अपने परिवार में माता पिता भाई आदि के मोबाईल पर इस तरह के मसेज देख रही है और मन बना लिया की वे अपने भाई की कलाई पर रक्षाबन्धन के दिन इंडियन राखी ही बांधेगी … और ये बात बहने एक दूसरी सहेली तक भी पहुंचा रही है ….यदि सौ बहनों के पास मसेज जा रहा है तो उनमे से पचास तो इसका पालन करती जरुर नजर आ रही है .. कुछ बहनो का कहना है की उनके घर में तो पहले से ही कलावा बाँधने का रिवाज है और वे कलावा को शुभ मानते है और कलावे से रक्त संचार भी कंट्रोल रहता है …

अब इस तरह के प्रचार से चाइना का सामान बेचने वाले भारतीय व्यापारी भी चिंतित है ..क्योकि करोड़ो रूपये की चाइनीज राखी मार्किट में आई है और छोटे व्यापारी उन्हें खरीद नहीं रहे .. अब इसे स्वदेशी का प्रचार कहे या लोगो की चाइना द्वारा बार बार सीमा उल्घंन से पैदा घृणा ..वजह चाहे जो भी हो पर लगता है इस तरह चाइनीज सामान का बाईकाट कर आम लोग भी चाइना को जवाब दे रहे है ………………..

अनिल अत्री

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