November 26, 2022

जब महामारी विश्व भर में मानव जीवन और अर्थव्यवस्थाओं का विध्वंस कर रही है, बुद्ध के संदेश किसी प्रकाश स्तंभ की तरह काम कर रहे हैं: राष्ट्रपति

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि जब महामारी विश्व भर में मानव जीवन और अर्थव्यवस्थाओं का विध्वंस कर रही है, बुद्ध के संदेश किसी प्रकाश स्तंभ की तरह काम कर रहे हैं। भगवान बुद्ध ने प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए लोगों को लालच, घृणा, हिंसा, ईष्‍या और कई अन्य बुराइयों को त्यागने की सलाह दी थी। उसी प्रकार की पुरानी हिंसा और प्रकृति की अधोगति में शामिल बेदर्द मानवता की उत्कंठा के साथ इस संदेश की परस्पर तुलना करें। हम सभी जानते हैं कि जैसे ही कोरोना वायरस की प्रचंडता में कमी आएगी, हमारे सामने जलवायु परिवर्तन की एक बड़ी गंभीर चुनौती सामने आ जाएगी।

राष्ट्रपति आज (4 जुलाई, 2020) राष्ट्रपति भवन में धर्म चक्र दिवस के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय बुद्ध परिसंघ द्वारा आयोजित एक वर्चुअल समारोह को संबोधित कर रहे थे।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत को धम्म की उत्पत्ति की भूमि होने का गौरव हासिल है। भारत में हम बौद्ध धर्म को दिव्य सत्य की एक नई अभिव्यक्ति के रूप में देखते हैं। भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति और उसके बाद के चार दशकों तक उनके द्वारा उपदेश दिया जाना बौद्धिक उदारवाद और आध्यात्मिक विविधता के सम्मान की भारतीय परंपरा की तर्ज पर था। आधुनिक युग में भी, दो असाधारण रूप से महान भारतीयों-महात्मा गांधी और बाबा साहेब अंबेडकर ने बुद्ध के उपदेशों से प्रेरणा पाई और और उन्होंने राष्ट्र की नियति को आकार दिया।

राष्ट्रपति ने कहा कि उनके पदचिन्हों का अनुसरण करते हुए, महान पथ पर चलने के उनके आमंत्रण के प्रत्युत्तर में हमें बुद्ध के आह्वान को सुनने का प्रयत्न करना चाहिए। ऐसा लगता है कि यह दुनिया अल्प अवधि तथा दीर्घ अवधि दोनों ही प्रकार से कष्टों से भरी हुई है। राजाओं और समृद्ध लोगों की ऐसी कई कहानियां हैं कि भयंकर अवसाद से पीड़ित होने के बाद कष्टों से बचने के लिए उन्होंने बुद्ध की शरण ली। वास्तव में, बुद्ध का जीवन पहले की धारणाओं को चुनौती देता है क्योंकि वह इस अपूर्ण विश्व के मध्य में कष्टों से मुक्ति पाने में विश्वास करते थे।

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