PHONE : +91-011-23626019
(M) 09811186005
Email : crimehilore@gmail.com ,
editor.crimehilore@gmail.com


Breaking News
टूटी झुग्गियाँ, कड़ाके की ठण्ड में गरीब खुले में रहने को मजबूर

टूटी झुग्गियाँ, कड़ाके की ठण्ड में गरीब खुले में रहने को मजबूर

राजधानी दिल्ली में कड़ाके की ठण्ड अभी शुरू ही हुई है ऐसे में जहाँ तमाम सरकारी गैर सरकारी संगठन झुग्गी झोपड़ियो में रहने वाले और गरीब लोगो के लिए ठण्ड में गर्म कपडे कम्बल डोनेट करने के लिए आम लोगो को प्रेरित कर रहे है वही दिल्ली के शकूर बस्ती सीमेंट साइडिंग पर बनी झुग्गियों को और उनमे रहने वाले तमाम गरीबो को आज कड़ाके ठण्ड में खुले आसमान में उनके आशियाने तोड़ कर रहने को मजबूर कर दिया है निर्माणित झुग्गियां हालांकि रेलवे की ज़मीन पर बनी हुई थी और रेलवे ने काफी सालो से इसी ख़ाली कराने की बाबत प्रयास किये और केंद्र सरकार के निर्देश पर भारी पुलिस बल के साथ इन झुग्गियों को तोड़ दिया गया जिसके फलसवरूप हजारों लोग ठण्ड में खुले आसमान में अपने छोटे छोटे बच्चों के साथ ठिठुरने को मजबूर है इनके लिए सरकार ने न ही कोई स्थाई या अस्थाई विकल्प ही बनाया है और न ही ठण्ड से बचने के लिए कम्बल या अस्थाई आश्रय ऐसे में काफी बड़ी तादात में इन गरीबो को ठण्ड से बीमार होने की संम्भावना है न ही कोई पूर्व सूचना दी गई और नहीं ही कोई व्यवस्था। यहाँ पर रेलवे के इंजीनियर के साथ भारी पुलिस बल ने बुलडोजरों क्रेनों की मदत से कुछ ही देर में सभी आशियाने थोड़ दिए कुछ गरीबो ने रोकने की कोशिश की जिसमे वह कामयाब नहीं हो पाए कई लोग अपने घरो को उजड़ते देख वही होश खो बैठे बड़ी तादात में लोग अब खुले आसमान के नीचे है अपना सामान और बच्चों को लिए बैठे है पर सवाल उनके सामने बस यही की इस ठण्ड में आखिर वह कहाँ जाए इस वक्त इन्हें मदद की दरकार है क्या कोई इनकी मदद करेगा या बस यूँ ही सरकारी गैर सरकारी संस्थान गरीबो की मदद का दम्भ भरते है ?
दिल्ली से विक्रम गोस्वामी की रिपोर्ट

ShareShare on Google+0Pin on Pinterest0Share on LinkedIn0Share on Reddit0Share on TumblrTweet about this on Twitter0Share on Facebook0Print this pageEmail this to someone

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*


You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>