December 9, 2022

दिल्ली में वायु प्रदुषण की जांच हेतु लधु तथा दीर्घ अवधि प्रयासों को अपनाने की जरूरत:उपराज्यपाल

दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने 1 अगस्त को राज निवास में आयोजित एक बैठक में दिल्ली में वायु और जल प्रदूषण की जांच के लिए बनाई गई उच्च अधिकार प्राप्त समिति की सिफारिशो को स्वीकार कर लिया। इस बैठक में समिति के सदस्यों के साथ साथ संबंधित विभागों के विभााध्यक्ष भी उपस्थित थे। दिल्ली के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च अधिकार प्राप्त समिति को दिल्ली में वायु और जल प्रदूषण को जांचने और कम करने के उपायों के बारे में सुझाव देने हेतु निर्देश दिया गया था। उच्च अधिकार प्राप्त समिति ने सरकारी विभागों, विशेषज्ञों और अन्य संबंधित विभागों से चर्चा के उपरांत दिल्ली में प्रदूषण को कम करने के लघु और दीर्घ अवधि उपाय सुझाये हैं।

उच्च अधिकार प्राप्त समिति द्वारा लघु और दीर्घ अवधि उपायों में से कुछ इस प्रकार हैंः-

वायु प्रदूषण कम करने के लघु अवधि उपाय –

1. सभी वाहनों के लिए प्रदुषण नियंत्रण हेतु मानदण्ड सख्ती से लागू किए जाएं।

2. दिल्ली में अनिर्धारित गंतव्य के वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण।

3. ’नो टालरेन्स जोन’ चिह्नित युक्तिसंगत पार्किंग पाॅलिसी को बनाना।

4. दिल्ली पंजीकृत वाहनों के लिए यूरो-अ नियमों को लागू करना।

5. बैटरी चालित प्रदूषणरहित वाहनों को बढावा देना।

6. सड़कों से यातायात को कम करने के लिए मैट्रो तथा सार्वजनिक यातायात के साधनों जैसे- बस आदि के प्रयोग को बढ़ावा देना।

7. कुड़ा-करकट और बागवानी अपशिषट को अवैध तरीके से जलाने पर रोक, बागवानी अपशिषट को रिफ्यूज डिराईवड फ्यूल में बदलने के लिए प्रेरित करना।

8. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता जांच केन्द्रों की स्थापना।

9. हरित दिल्ली के लिए कार्ययोजना को मजबूती से लागू करना।

10. प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली के नागरिकों के साथ मिलकर जनजागरूकता अभियान चलाया जाए।

वायु प्रदूषण कम करने के दीर्घ अवधि उपाय-

1. शहर के लिए सार्वजनिक यातायात योजना का विकास और इसको समय पर लागू किया जाए।

2. वाहन प्रदूषण में कमी हेतु केन्द्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन।

3. शहर की सीमा पर ट्रांस-शिपमेंट जोन बनाकर सामान को शहर में आने से रोका जाए ।

4. इनलैण्ड कंटेनर डिपो का अन्य स्थानों पर स्थानांतरण।

5. सार्वजनिक यातायात को बढ़ावा देने के लिए शहरी यातायात फण्ड की स्थापना।

जल प्रदूषण को कम करने के लघु अवधि उपाय –

1. सभी सीवर और ओद्योगिक अपशिष्ट पानी का उपचार ।

2. सीवर जलशोधन संयंत्र आदि द्वारा प्राप्त संशोधित जल का ज्यादा से ज्यादा उपयोग ।

3. अपशिष्ट पदार्थों को नाले आदि में फेंकने से रोकना।

4. संशोधित गन्दे पानी का सही तरीके से उपयोग।

5. सीवर कनेक्शन के लिए युक्ति संगत शुल्क का प्रावधान।

6. गंदगी फैलाने के लिए कठोर दंड के प्रावधान हेतु साफ-सफाई संबंधित उपनियमोंं की अधिसूचना ।

7. वर्षा जल संचयन तथा भू जल पुनः भरण के बारे में प्रचार।

8. खतरनाक, निर्माण और तोडफोड से निकलने वाले मलवे के निस्तारण, उपचार और रखरखाव आदि के स्थान।

9. जल के सही उपयोग के बारे में लोगों को बताना।

10. इन सभी उपायों में लोगो की सहभागिता तथा लोगों को जागरूक करने के लिए जन जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाए।

जल प्रदूषण को कम करने के दीर्घ अवधि उपाय –

1. तीन सालों के अंदर शत-प्रतिशत सीवर और औद्योगिक अपशिष्ट का उपचार सुनिश्चित करना ताकि सीवर और औद्योगिक अपशिष्ट यमुना नदी में न मिल सके।

2. यमुना नदी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अतिक्रमण को हटाना।

उपराज्यपाल ने उच्च अधिकार प्राप्त समिति की सिफारिशो को स्वीकार करते हुए सभी विभागों को निर्देश दिए कि वह इन सुझावों को लागू करने के लिए विभागवार कार्ययोजना अगले तीन हफ्तों में प्रस्तुत करें। उन्होने सभी विभागों को इस संबंध में समय सीमा के भीतर उप कार्य योजना बनाने के भी निर्देश दिए। उन्होने आगे कहा कि इन सुझावों को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने के लिए विधायी संशोधन की जरूरत होगी।

उपराज्यपाल सचिवालय में इस संबंध में किए गए कार्यो को पाक्षिक रूप से देखने के लिए एक प्रोजेक्ट इमंप्लीमेंटशन यूनिट बनाया गया है। उपराज्यपाल ने कहा कि इसको सरकार के सभी विभागों द्वारा मिशन के रूप में लेने की जरूरत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.


Previous post NBT Celebrates 57th Foundation Day
Next post हिन्दूराव अस्पताल में डाक्टर्स इंंफार्मेशन वेबसाइट एवं एसएमएस सेवा की शुरुआत