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दिल्ली में 27 अक्टूबर से” पटाखे नहीं, दिया जलाओ “अभियान शुरू  करेगी केजरीवाल सरकार

दिल्ली में 27 अक्टूबर से” पटाखे नहीं, दिया जलाओ “अभियान शुरू करेगी केजरीवाल सरकार

दीपावली पर अखबारों में छपने और टीवी पर चलने के लिए जो भी विज्ञापन बन रहे हैं, उसमें दिपावली के प्रतीक के तौर पर पटाखे की जगह दीये का प्रयोग करें- गोपाल राय

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने दिल्ली पुलिस और पर्यावरण विभाग के अधिकारियों के साथ आज संयुक्त बैठक की। जिसमें दिल्ली में 27 अक्टूबर से “पटाखे नहीं, दिया जलाओ” अभियान शुरू करने का फैसला किया गया। गोपाल राय ने कहा कि केजरीवाल सरकार पटाखे नहीं, दिया जलाओ अभियान के जरिए पटाखों को जलाने से लोगों को रोकेगी। लोगों को दिवाली, दीये के साथ मनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी। दिल्ली पुलिस के सभी 15 जिलों में 15 केंद्रीय टीम बनायी जाएंगी। जिसमें करीब 157 सदस्य होंगे। पुलिस के साथ-साथ 33 एसडीम के नेतृत्व में टीमों का गठन किया गया है, जो दिल्ली के अंदर अलग-अलग हिस्सों में इस अभियान के तहत कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लघंन मिलने पर पुलिस और एसडीम‌ की तरफ से आईपीसी की संबंधित धारा के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान उन्होंने अपील की कि दीपावली पर अखबारों में छपने और टीवी पर चलने के लिए जो भी विज्ञापन बन रहे हैं, उसमें दिपावली के प्रतीक के तौर पर पटाखे की जगह दिए का प्रयोग करें।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने सचिवालय में प्रेस वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि ‌दिल्ली के अंदर प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा युद्ध प्रदूषण के विरुद्ध अभियान पूरे चलाया जा रहा है। जिसमें एंटी डस्ट अभियान, रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ अभियान और पराली को गलाने का अभियान शामिल है। इसके साथ-साथ दिल्ली के प्रदूषण में दिवाली के समय पटाखों के जलने से प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है। उसे रोकने के लिए सरकार ने पहले ही यह निर्णय लिया है कि इस बार दिवाली के अवसर पर पटाखे की खरीद-बिक्री और उसे जलाना बैन रहेगा।

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने पुलिस और जिला मजिस्ट्रेट को 28 सितंबर को नोटिफिकेशन जारी किया था‌ कि दिल्ली के अंदर लाइसेंस देना भी बैन है। पिछले साल ग्रीन पटाखों को लाइसेंस दिया गया था। व्यापारियों ने पटाखे खरीद लिए और दुकानों में जमा कर लिए,‌लेकिन अंतिम समय पर पटाखे बैन होने से काफी नुकसान हुआ। इसलिए सरकार ने इस बार पहले से ही निर्णय लिया कि हम पटाखे बैन करेंगे। इसलिए किसी को दिल्ली के अंदर लाइसेंस नहीं दिया गया।

उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस लाइसेंसिंग हेड क्वार्टर की तरफ से 06 अक्टूबर को सभी जिलों में आदेश जारी किए गए कि इस बार इसको बैन रखना है।‌ बैन होने के बावजूद भी कई जगह से यह खबरें आ रही थीं कि कई लोग पटाखों की खरीदी कर रहे हैं। इस जमीनी स्तर पर कैसे लागू किया जाए‌ और लोगों को कैसे जागरूक किया जाए, इसके लिए आज दिल्ली पुलिस और पर्यावरण विभाग के अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक की है। जिसमें सभी जिलों के पुलिस प्रतिनिधि और लाइसेंसिंग हेडक्वार्टर ने भाग लिया है।

गोपाल राय ने कहा कि इस बैठक में फैसला किया कि पटाखे नहीं, दिया जलाओ अभियान 27 अक्टूबर से शुरू करेंगे। इस अभियान के दो हिस्से हैं। पहला पटाखे जलाने से लोगों को रोकना और दूसरा आरडब्ल्यूए के साथ पुलिस अधिकारी, एसडीएम के जरिए बैठक कर लोगों को दिवाली दिए के साथ मनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इसलिए इस अभियान को 27 अक्टूबर से शुरू कर रहे हैं।

बैठक में फैसला लिया है कि दिल्ली के अंदर सभी जिलों में एक केंद्रीय टीम होगी, जो पटाखा फोड़ने‌ पर रोक लगाने का काम करेगी। दिल्ली पुलिस के 15 जिले हैं, उसमें 15 केंद्रीय टीम बनेगी। जिसमें करीब 157 सदस्य होंगे। एक टीम में 5 से 7 सदस्य होंगे जो जिला स्तर पर पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व करेंगे। उसके साथ साथ दिल्ली के अंदर 157 थानों के स्तर पर भी तो दो-दो लोगों की टीम बनेगी। दिल्ली के अंदर थानों के स्तर पर पटाखों की खरीद-बिक्री और फोड़ने की जांच की जाएगी। जिला स्तरीय टीमें जहां पर पटाखों की बिक्री होती थी और पहले जिन बाजारों में पटाखे बिकते थे, वहां पर पेट्रोलिंग का काम करेंगे। आरडब्ल्यूए और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर लोगों को पटाखे नहीं फोड़ने और दिए जलाने के लिए जागरूक करेंगे।

पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि पूरी दिल्ली के अंदर कहीं भी पटाखे की खरीद-बिक्री या जलाने की घटना सामने आती है तो दिल्ली पुलिस को 112 नंबर पर कॉल करके सूचना दे सकते हैं। जिसके आधार पर पुलिस रोकने के लिए कार्रवाई करेगी। पुलिस के साथ-साथ एसडीएम की टीम भी इस अभियान में लगेगी। 33 एसडीम के नेतृत्व में टीमों का गठन किया गया है, जो दिल्ली के अंदर अलग-अलग हिस्सों में इस अभियान के तहत कार्रवाई करेंगे।

उन्होंने बताया कि दिल्ली के अंदर एसडीएम को 27 अक्टूबर से इस अभियान में शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। एसडीएम को दिल्ली के सभी क्षेत्रों में आरडब्ल्यूए, मार्केट एसोसिएशनों, एनजीओ के साथ 28, 29 अक्टूबर को जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। उसके बाद यह सभी टीमें अपने-अपने इलाकों में बैठक करेंगी।

दिल्ली के लोगों से अपील है कि दीए जलाकर दिवाली मनाएं। दिए से दीपावली मनाई जाती है। पटाखों से प्रदूषण फैलता है। हमें दीपावली को धूमधाम से मनाना है लेकिन उतनी ही जिम्मेदारी से प्रदूषण पर लगाम लगाना है। इसलिए दिल्ली के बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों और जिम्मेदारी नागरिकों से अपील है कि पटाखों को दीपावली का पर्याय ना बनाएं। दीप से दीपावली बनी है। जिंदगी के खतरे हमारे ऊपर हैं। खासतौर पर दिवाली के आसपास पराली का धुआं बाहर से आता है। दिल्ली के अंदर जब पटाखों का धुआं घुलता है तो हमारे बुजुर्गों की जिंदगी कम हो जाती है।‌ उनके लिए मुश्किल हो जाती है। इसके अलावा जो छोटे बच्चे हैं, वह उसी हवा में बाहर दौड़ते हैं। इससे उनकी जिंदगी पर असर पड़ता है। इसलिए हमें दीया भी जलाना और दीपावली भी मनाना है और लोगों की जिंदगी भी बचानी है।‌ पुलिस, जिलाधिकारी, एसडीएम और प्रशासन सहित सारा अमला भी इसमें लग जाए तो इसको रोक नहीं सकता है। इसको तभी रोका जा सकता है जब दिल्ली का हर नागरिक एक प्रदूषण योद्धा बन करके पर्यावरण को बचाने के लिए मोर्चा संभाल लेगा तो इस दिवाली को पहले से बेहतर बना सकते हैं। लोगों की सांसो पर जो संकट आता है, उससे बचा सकते हैं।

गोपाल राय ने कहा कि अगर फिर भी कोई नहीं मानता है तो पुलिस और एसडीम तरफ से आईपीसी की धारा 188 और 286 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ साथ एक्सप्लोसिव एक्ट 5/9बी के तहत कार्रवाई की जाएगी। अगर कोई जिद पर अड़ा है कि हम लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करेंगे तो उसके खिलाफ इन धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि दिवाली के आस-पास बहुत सारे विज्ञापन अखबारों में छपते और टीवी में भी चलते हैं। उसमें दिवाली पर पटाखे फोड़ते हुए चित्र दिखाते हैं। उससे बहुत सारे लोगों को लगने लगता है कि दिवाली का मतलब पटाखा ही फोड़ना है। ऐसे में जो भी ऐड बन रहे हैं उसमें दिपावली के प्रतीक के तौर पर दिए का प्रयोग करें। दीए को अगर उसमें दिखा जाए तो बच्चों में संदेश जाएगा कि होली पर लोग रंग लगाते हैं, उस समय पटाखे नहीं छोड़ते हैं। दिवाली तब से बन रही है जब से पटाखों की उत्पत्ति नहीं हुई थी। लेकिन धीरे-धीरे दिमाग में बैठ गया कि दीपावली का मतलब पटाखा फोड़ना है। सभी एड एजेंसियों से अपील है दीपावली का विज्ञापन निकाल रहे हैं या प्रचार कर रहे हैं तो उसमें पटाखे की फोटो की जगह दिए का उपयोग करें। उससे भी लोगों में जागरूकता बढ़ती है।

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