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दिल्ली विधानसभा में कोरोना महामारी के दौरान लोगों की सेवा करने के लिए भारतीय डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ को भारत रतन और पद्म पुरस्कारों से सम्मानित करने का प्रस्ताव पारित

दिल्ली विधानसभा में कोरोना महामारी के दौरान लोगों की सेवा करने के लिए भारतीय डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ को भारत रतन और पद्म पुरस्कारों से सम्मानित करने का प्रस्ताव पारित

दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र में कोरोना महामारी के दौरान अपनी जान दांव पर लगाकर लोगों की सेवा करने के लिए डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टाफ को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित करने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया। सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार ने इस बार केवल डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टाफ के नाम पद्म अवॉर्ड्स के लिए केंद्र सरकार को भेजने का निर्णय लिया है। इसके लिए हमने तीन दिन पहले ईमेल एड्रेस जारी किया था और अब तक करीब 2100 डॉक्टर्स के नाम आ चुके हैं। पूरा देश डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्सेज, वार्ड बॉयज समेत सभी फ्रंटलाइन वर्कर्स को सम्मानित करना चाहता है और शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि देना चाहता है। इस दौरान ‘आप’ विधायक सौरभ भारद्वाज ने सदन में भारतीय डॉक्टर को सामूहिक रूप से भारत रत्न दिया जाए’ का संशोधन प्रस्ताव रखा, जिसका मुख्यमंत्री ने समर्थन करते हुए कहा कि अगर भारतीय डॉक्टर को सामूहिक रूप से भारत रत्न से नवाजा जाता है, तो पूरे देश को खुशी होगी और पूरे मेडिकल बिरादरी का हौसला बढ़ेगा।

दिल्ली विधानसभा के दो दिवसीय मानसून सत्र आज संपन्न हो गया। मानसून सत्र के आखिरी दिन आम आदमी पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने कोरोना महामारी के दौरान सेवा देने वाले डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को भारत सरकार द्वारा पद्म पुरस्कारों से सम्मानित करने का प्रस्ताव रखा। इस दौरान सदन में मौजूद सदस्यों ने ध्वनि मत से इस प्रस्ताव को पारित करने पर सहमति जताई। जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने प्रस्ताव को पारित कर दिया।

*पूरे देश का फर्ज बनता है कि हम अपने डॉक्टर्स, नर्सेज और पैरामेडिकल स्टाफ को धन्यवाद करें और उचित सम्मान दें- अरविंद केजरीवाल*

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को भारत सरकार द्वारा पद्म पुरस्कारों से सम्मानित करने के प्रस्ताव का समर्थन किया और कहा कि हम सब लोगों ने देखा कि पिछले डेढ़ साल से हमारा देश ही नहीं, पूरी दुनिया कोरोना की महामारी से जूझ रही है। इस दौरान हमारे डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टाफ ने अपनी जान दांव पर लगाकर लोगों की सेवा की। इस सदन में मुझसे पहले हमारे विधायक और विपक्ष के वक्ता भी इस बारे में कई उदाहरण भी दे चुके हैं कि किस तरह से कोई डॉक्टर छह-छह महीने तक अपने घर नहीं गया। कई ऐसे डॉक्टर्स थे, जिन्होंने अपने परिवार की परवाह किए बिना, अपनी जिंदगी के बिना, दूसरों की लगातार सेवा करते रहे। ऐसे वक्त में जब अपने परिवार के लोग कोरोना के मरीज को छूने को तैयार नहीं थे, उस वक्त डॉक्टर्स ने उनकी लगातार सेवा की। ऐसे में पूरे समाज का और पूरे देश का फर्ज बनता है कि हम अपने डॉक्टर्स, नर्सेज और पैरामेडिकल स्टाफ को उनका धन्यवाद करें और उनको उचित सम्मान दें।

*हमें महामारी के दौरान पूरी मेडिकल बिरादरी से सहयोग मिला और कभी किसी ने विरोध नहीं किया- अरविंद केजरीवाल*

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार ने समय-समय पर जितना हो सका, दो कदम आगे बढ़कर डॉक्टर्स का साथ दिया। जब कोरोना की महामारी शुरू हुई थी, उस वक्त यह था कि 15 दिन डॉक्टर काम करेंगे और उसके बाद उनको क्वारंटीन में रहना पड़ेगा और इसके बाद वह अपने घर जा सकते हैं। तब हम लोगों ने फाइव स्टार होटल में उनके रहने का इंतजाम कर दिया था। शायद दिल्ली सरकार पूरे देश में ही नहीं, पूरी दुनिया में अकेली सरकार थी, जितने डॉक्टर्स के रहने का फाइव स्टार होटल में इंतजाम किया था। उसके बाद देश भर से कुछ जगहों से ऐसी खबरें आई और पता चला कि कुछ मेडिकल स्टाफ कोरोना का इलाज करने में सरकार के अलग-अलग आदेशों का पालन करने के लिए तैयार नहीं था, क्योंकि सरकारों ने वह आदेश बिना मेडिकल बिरादरी के साथ सलाह किए बिना पारित किए थे। दिल्ली सरकार ने एक निर्णय लिया कि हम अगर कोई भी आदेश पारित करेंगे, तो ऐसा कोई भी आदेश नहीं होगा, जो कि डॉैक्टर्स और पैरामेडिकल स्टाफ से बिना सलाह किए और बिना उनकी मर्जी के नहीं पारित किया जाएगा। जिसमें आदेश जारी किए, वह सरकारी हॉस्पिटल और प्राइवेट हॉस्पिटल, डॉक्टर और मेडिकल बिरादरी के साथ सलाह करके पारित किए गए। यह अच्छी चीज है कि दिल्ली सरकार का कोई भी ऐसा आदेश नहीं था, जिसका किसी ने भी विरोध किया। हमें इस पूुरी महामारी के दौरान प्राइवेट अस्पतालों से और डॉक्टर्स, सरकारी अस्पतालों और पूरी मेडिकल बिरादरी से पूरा सहयोग मिला। ऐसा कभी नहीं हुआ कि कभी किसी ने हमारे आदेशों का विरोध किया।

*सरकार की ओर से सम्मान राशि के एलान से सभी डॉक्टर्स और फ्रंटलाइन वर्कर्स का मनोबल बढ़ा- अरविंद केजरीवाल*

सीएम अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि जब हमने यह घोषणा की कि जब किसी भी डॉक्टर या फ्रंट लाइन वर्कर की कोरोना में डृयूटी करते हुए उनको कोरोना हो जाता है और उनकी कोरोना की वजह से शहादत हो जाती है, तो उनके परिवार को एक करोड रुपए की सहायता राशि दी जाएगी। यह एक ऐसा ऐलान था, जो कि पूरे देश में ही नहीं, पूरी दुनिया के अंदर शायद दिल्ली सरकार अकेली ऐसी सरकार है, जिसने ऐसा आदेश पारित किया। इससे हमारे सभी डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और फ्रंटलाइन वर्कर्स का मनोबल बढ़ा। उन्हें यह लगा कि यह ऐसी सरकार है, जो हमारे साथ खड़ी है। कल को अगर हमें कुछ हो भी जाता है, तो सरकार हमारे परिवार का ख्याल रखेगी। उनका मनोबल बढ़ा और उन्होंने पूरी लगन के साथ काम किया। दिल्ली के डॉक्टर्स ने खासकर बहुत लगन के साथ काम किया। एक-एक फ्रंटलाइन वर्कर जिनके भी केस आए, हमने एक नहीं कई मामलों में एक-एक करोड़ रुपए की धनराशि दी है। मैं खुद हर एक के घर पर जाकर उनके परिवार के लोगों को वह धनराशि देकर आया।

*तीन दिन में पद्म अवार्ड के लिए करीब 2100 डॉक्टर्स के नाम आ चुके हैं- अरविंद केजरीवाल*

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार ने एक और निर्णय लिया है। हर वर्ष हमारा देश अलग-अलग क्षेत्रों के अंदर चुनिंदा लोगों को पद्म अवार्ड से सम्मानित करता है। इसके लिए केंद्र सरकार अलग-अलग राज्य सरकारों से ऐसे चुनिंदा लोगों के नाम मांगती है। दिल्ली सरकार ने निर्णय लिया है कि इस बार हम केवल डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टाफ के नाम पद्म अवॉर्ड्स के लिए अनुशंसित करेंगे। हमें केंद्र सरकार को 15 सितंबर तक यह नाम भेजने है। अभी तीन दिन पहले मैंने यह ऐलान किया था। इसमें कोई खुद का नाम भी अनुशंसित कर सकता है और कोई दूसरे के नाम की भी अनुशंसा कर सकता है। मान लीजिए आप मरीज थे और आपने देखा कि वहां कोई डॉक्टर बहुत अच्छा काम कर रहा है, तो आप उसके नाम को भी अनुशंसित कर सकते है। तीन दिन पहले हम लोगों ने ईमेल एड्रेस जारी किया था और आज इस सदन को बताते हुए मुझे बेहद खुशी है कि तीन दिन के अंदर हमारे पास करीब 2100 डॉक्टर्स के नाम आ चुके हैं। हम यह सारे नाम केंद्र सरकार को भेजेंगे।

*मुख्यमंत्री ने सदन में प्रस्तुत संशोधन प्रस्ताव ‘भारतीय डॉक्टर को सामूहिक रूप से भारत रत्न दिया जाए’ का समर्थन किया*

सीएम ने कहा कि जो यह प्रस्ताव है, ‘यह सदन अनुशंसा करता है कि कोरोना महामारी के दौरान सेवा देने वाले दिल्ली के डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को पद्म पुरस्कारों के लिए चुना जाए।’ हम सदन की तरफ से केंद्र सरकार से निवेदन करते हैं जिन-जिन डॉक्टर्स के नाम पद्म अवार्ड के लिए भेजे जाएं, उन्हें पद्म अवार्ड से सम्मानित किया जाए। मैं केवल दिल्ली की बात नहीं कर रहा हूं, पूरे देश भर से इस बार जिन-जिन डॉक्टर्स के नाम आएं, उन सब लोगों को पद्म अवार्ड से सम्मानित किया जाए। दूसरी बात, विधायक सौरभ भारद्वाज ने इसमें जोड़ा है कि यह सदन अनुशंसा करता है कि भारतीय डॉक्टर को सामूहिक रूप से भारत रत्न दिया जाए। मुझे लगता है यह बहुत जरूरी है। इसमें जब हम भारतीय डॉक्टर की बात करते हैं, तो इसमें देशभर के सारे डॉक्टर, देश भर के सारे पैरामेडिक्स स्टाफ, नर्सेज वार्ड बॉयज, इसमें सब आते हैं। हम सब लोग, यह पूरा देश उन सबको सम्मानित करना चाहता है। उन सबको धन्यवाद करना चाहता है। जितने लोग शहीद हो गए, उनको श्रद्धांजलि देना चाहता है। उनके परिवार के साथ हम खड़े हैं। उनका सम्मान करते हैं। यह संदेश हमारा देश देना चाहता है। अगर ऐसा होता है कि भारतीय डॉक्टर को भारत रत्न से नवाजा जाता है, तो पूरा देश इसके साथ है और पूरा देश ऐसा चाहता है। हमारे पूरे देश को इससे संतुष्ट होगी और हमारे पूरे मेडिकल बिरादरी का हौसला बढ़ेगा कि हमारे देश ने हमारा सम्मान किया। मैं यह जो प्रस्ताव है और इसमें जो संशोधन है, मैं दोनों का समर्थन करता हूं।

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