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दिल्ली हाई कोर्ट के सख्त आदेश के बाद भी पहाड़ गंज में खुलेआम हो रहा है अवैध निर्माण

दिल्ली हाई कोर्ट के सख्त आदेश के बाद भी पहाड़ गंज में खुलेआम हो रहा है अवैध निर्माण

दिल्ली में आप जहाँ नज़र डाले वही आपको अवैध निर्माण देखने को मिल जायेगा। हमने पहले भी आपको बताया था की कैसे एम् सी डी और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से दिल्ली हाई कोर्ट / उप राज्यपाल व् नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल आदेशों की अवहेलना करते हुए सभी निगम कानून को ठेंगा दिखते हुए दिल्ली के मध्य बसे पहाड़ गंज में अवैध निर्माण किया जा रहा है।

स्थानीय निवासियों से मिली जानकारी के मुताबिक पहाड़ गंज में चल रहे जायदातर अवैध निर्माण में सत्ताधारी पार्टी के पदाधिकारी शामिल है , जिनका काम ही सरकारी जमीनों व् स्लम के कटरो पर कब्ज़ा कर उन पर अवैध निर्माण कर अवैध रूप से होटल्स व् फ्लैट्स का निर्माण करना है। और इन सब अवैध गतिविधियों को आखिरी मुकाम तक पहुँचने में अहम् भूमिका रहती है एम् सी डी , डी डी ए और स्थानीय पुलिस की ?

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ समय पूर्व पहाड़ गंज में चल रही इन अवैध निर्माणों को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गयी थी। सुनवाई के दौरान इस जनहित याचिका नम्बर W P ( C ) 9151/2017 में माननीय चीफ जस्टिस गीता मित्तल व् जस्टिस सी. हरी शंकर की बैंच ने बीते दिनों 17/10/2017 को दिल्ली की नार्थ दिल्ली म्युनिसिपल कार्पोरेशन के कमिश्नर को सख्त आदेश हुए कहा की जनहित याचिका के अनुसार पहाड़ गंज में चल रही पर डी एम् सी एक्ट के तहत कार्यवाही करे और 4 हफ्तों में हलफ़नामा ( एफिडेविट ) दाखिल करे की इन अवैध निर्माणों पर किया तोडा गया है / सील किया गया है / कानून के तहत कार्यवाही की भी है या नहीं ?

आपको बता दे की सूत्रों से जो जानकारी मिली है उनके अनुसार शिकायतकर्ता ने पहाड़ गंज में चल रहे इन अवैध निर्माणों की सूचना बीते वर्ष की दिनाँक 17/12/2016 में लिखित शिकयत दी थी / जिस पर ये सभी अवैध निर्माण ऑनगोइंग कंस्ट्रक्शन डी एम् सी एक्ट के तहत सीलिंग और तोड़ने के लिए बुक कर ली गयी थी। लेकिन बीते वर्ष से लेकर आज तक दिल्ली हाई कोर्ट के सख्त आदेशों के बाद भी इन अवैध निर्माणों में काम बड़ी तेज़ी से चल रहा है। जबकि बीते दिनों दिल्ली में बढ़ते प्रदुषण को भी देखते हुए दिल्ली के उपराज्यपाल व् एन जी टी के सख्त आदेशों के बाद भी खास कर पहाड़ गंज में अवैध निर्माण रुकने का नाम नहीं ले रहा है ?

वही दिल्ली के पहाड़ गंज में चल रहे इन अवैध निर्माणों की सूची इस प्रकार है।

1 . प्रॉपर्टी नम्बर 569-570 मंटोला पहाड़ गंज नई दिल्ली -55
2 . प्रॉपर्टी नम्बर 2882 /4 , चूना मंडी पहाड़ गंज , नई दिल्ली -55
3 . प्रॉपर्टी नम्बर 5354 , लड्डू घाटी , पहाड़ गंज , नई दिल्ली -55
4 . प्रॉपर्टी नम्बर 8665 आरा कशा रोड, पहाड़ गंज , नई दिल्ली -55 ( ओल्ड संजीवन हॉस्पिटल
5 .गली चांदी वाली , पहाड़ गंज में चल रहे अवैध निर्माण
6 . 826 रतन गली , मंटोला, पहाड़ गंज, नई दिल्ली
7 . 8940 / 1 मुल्तानी ढांडा , पहाड़ गंज , नई दिल्ली
8 . 3426 देश बंधू गुप्ता रोड , पहाड़ गंज, नई दिल्ली
9. 2024 , गली नम्बर 7 , चुना मंडी , पहाड़ गंज, नई दिल्ली
10. 647 , मोहल्ला बावली, 6 टूटी चौक ,पहाड़ गंज , नई दिल्ली

लेकिन कोर्ट के सख्त आदेश के बाद भी खास कर उपरोक्त भवनों में आज भी अवैध निर्माण बिना किसी रोकटोक के चल रहा है ? आखिर जिम्मेदार कौन ? ऐसे में ये सवाल उठता है की दिल्ली हाई कोर्ट / दिल्ली के उपराज्यपाल व् नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT ) के सख्त आदेशो में बाद भी जिन सरकारी अधिकारियो के जिम्मे ये काम सौंपा गया की प्रदुषण और ना फैले , निर्माण कार्य ना हो। लेकिन वैध या अवैध निर्माण कार्य को रोका नहीं जा रहा और इसके बावजूद निर्माण कार्य चल कैसे रहा है ? आखिर क्यों वही अधिकारी उन अवैध निर्माणों को बनने से रोक नहीं रहे है ? तो मतलब साफ़ नज़र आता है की इन अवैध निर्माण को करने के लिए वसूली जा रही है मोटी रकम ? ये हम नहीं कहते ये कहना है आम जनता का। ,वही जनता जो कहती है चाहे कितनी भी शिकायत प्रशासन के कर ले लेकिन उसी प्रशासन के अधिकारी ही इन भू-माफियाओ के साथ मिलकर सरकार के राजस्व को चूना लगाते हुए सरेआम कानून की धज्जियां उड़ा उन्ही अवैध निर्माणों को केवल खानापूर्ति कर तेज़ी से करा रहे है ?लेकिन आपको ये भी बता दे की एम् सी डी ही क्षेत्रीय SHO को डी एम् सी एक्ट अंडर सेक्शन 344 के तहत एक वर्क स्टॉप नोटिस भेजती है की वो उस अवैध निर्माण को बंद करा दे लेकिन वही स्थानीय पुलिस फिर भी उस अवैध निर्माण को रुकवाती नहीं है ? आखिर क्यों ? आप बेहतर समझते है ? अगर इन्ही सरकारी अधिकारियो व् कर्मचारियों में विरुद्ध ही सख्त कार्यवाही हो तभी इन अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सकता है ?

अवैध निर्माणों पर पुलिस और निगमो को दिल्ली हाई कोर्ट की फटकार,भ्रष्टाचारियों पर मुकदमा दर्ज होगा।
आपको बता दे की दिल्ली में बढ़ते अवैध निर्माण पर नाराजगी जताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली नगर निगम को फटकार लगाई है। कार्यकारी चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी हरिशंकर ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए नगर निगम से सभी स्वीकृत बिल्डिंग्स और संपत्तियों के रिकॉर्ड तलब किए हैं। वही कार्यकारी चीफ जस्टिस गीता मित्तल ने दिल्ली में चल रहे अवैध निर्माण को लेकर एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान साफ़ कहा था की दिल्ली में 90% अवैध निर्माण करवाने में एम् सी डी के अधिकारियो का ही हाथ है।

हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वो अवैध निर्माण से जुड़ी सभी शिकायतों के रिकॉर्ड प्रस्तुत करे। एक याचिका में याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा है कि दिल्ली नगर निगम और दिल्ली पुलिस की नाक के नीचे अवैध निर्माण होते रहते हैं और कोई कार्रवाई नहीं होती है।

याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया है कि पुलिस कहती है कि वे बिना नगर निगम के हस्तक्षेप किए कुछ नहीं कर सकते हैं। याचिका में कहा गया है कि करीब चार सौ संपत्तियां अवैध रूप से निर्मित की गई हैं, जिसमें नगर निगम के अधिकारियों की भी मिलीभगत है। याचिका में कहा गया है कि अवैध रूप से बिल्डिंग प्लान भी स्वीकृत कर दिए जाते हैं। इस पूरे प्रकरण को अगर पुलिस और निगम ने दिल्ली हाईकोर्ट सही नही बताया तो कई पुलिस और निगम अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज हो सकता है ।

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