December 3, 2022

दैनिक भास्कर के पत्रकार तरुण सिसोदिया को विश्व पत्रकार महासंघ विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

अब सवाल कि उनकी आत्महत्या से किसी का जमीर जागेगा?ठीक कि वे अस्वस्थ थे।गंभीर बिमारी से जूझ रहे थे।लेकिन, समर्पण नहीं किया था।एक छोटी सी बच्ची के पिता तरुण लड़ रहे थे।ऐसे में यकायक आत्महत्या? लोग कह रहे हैं कि प्रबंधन ने उनसे इस्तीफा ले लिया था।नौकरी गंवाने का भय सता रहा था उन्हें।घोर असुरक्षा बोध!आदि आदि !!
ऐसे में प्रबंधन और संपादकीय के बीच सार्थक संबंध की पुनर्समीक्षा की कोई पहल करेगा?ध्यान रखें, पत्रकारिता एक जुनून है।इससे जुड़ने वाले सिर्फ नौकरी करने नहीं आते।समाज और देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा ले कर इस पवित्र पेशे से जुड़ते हैं।
ऐसे में हताशा कि कोई सदस्य आत्महत्या कर ले?

ऐसे में विश्व पत्रकार महासंघ दिल्ली प्रदेश सरकार से माग करता है कि इस मामले में उच्च स्तरीय जांच होनी ही चाहिए। साथ ही स्वर्गीय तरुण सिसोदिया के परिवार को उचित मुआवजा नहीं जाए।

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