December 3, 2022

निगम कर्मचारियों के हितों के लिए सिविक सेंटर से दिल्ली सचिवालय तक निकालेंगे मार्च- महापौर, जय प्रकाश

उत्तरी दिल्ली के महापौर जय प्रकाश, उत्तरी दिल्ली नगर निगम में स्थायी समिति के अध्यक्ष, श्री छैल बिहारी गोस्वामी और नेता सदन, श्री योगेश वर्मा ने आज प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम के कर्मचारियों के हितों के लिए हम सोमवार को निगम मुख्यालय सिविक सेंटर से दिल्ली सचिवालय तक मार्च निकालेंगे।
उत्तरी दिल्ली के महापौर, जय प्रकाश ने बताया कि दिल्ली सरकार उत्तरी दिल्ली नगर निगम का बकाया फंड ना दे कर उसे पंगू बनाना चाहती है ताकि नगर निगम दिल्लीवासियों के लिए विकास कार्य ना कर सके व अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन ना दे सके। महापौर ने कहा कि दिल्ली सरकार से निगम को 1600 करोड़ रुपये की अनुदान राशि प्राप्त होनी थी। इसमें से सरकार द्वारा केवल 400 करोड़ रुपये दिए गए हैं। जबकि 1200 करोड़ रुपये बकाया है। उन्होंने कहा कि हम सभी कर्मचारियों के साथ निगम मुख्यालय से दिल्ली सचिवालय तक मार्च निकालेंगे और आम आदमी पार्टी व कॉंग्रेस के पार्षद भी हमें इसमें सहयोग कर सकते हैं।
महापौर ने कहा कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने तीन अभियान गत दिनों शुरू किए थे जिस के अंतर्गत पौधारोपण अभियान में निगम में 75,000 से 80,000 तक विभिन्न क्षेत्रों में पौधे लगाए, जिस में विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं ने निगम की मदद की। उन्होंने बताया कि गंदगी मुक्त अभियान में विभिन्न क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया गया और ठोस अपशिष्ट पदार्थों का निपटान किया गया। उन्होंने बताया कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम प्रति दिन 4500 मीट्रिक टन कूड़ा उठाती है जिसमें से 2300 मीट्रिक टन कूड़ा नरेला बवाना संयंत्र में भेजा जाता। उन्होंने बताया कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत 550 डलाव है जिस में से 350 डलावो को बंद कर के 61 कॉम्पेक्टर मशीनें लगाई गई हैं। उन्होंने बताया कि निगम कूड़ा निष्पादित के लिए निगम 55 कॉम्पेक्टर मशीनें लगाने का कार्य प्रगती पर है। उन्होंने बताया कि कूड़ा एकत्रित करने के लिए 270 टिप्परों का कार्य भी प्रगती पर है।
महापौर ने कहा कि दिल्ली में जलजमाव के मुद्दे पर हाल ही में जल बोर्ड विभाग के साथ 132वीं बैठक का आयोजन किया गया था। इसमें नालों से गाद निकालने में प्रयोग की जाने वाली आठ जेटिंग मशीन के बारे में जानकारी दी गई थी। साथ ही यह भी बताया गया था कि मशीन को चलाने के लिए प्रति घंटा 7,101 रुपये का भुगतान किया जाता है। यानी कुल मिलाकर सरकार द्वारा 59.65 करोड़ का भुगतान किया गया, लेकिन इसके बाद भी दिल्ली में जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हुई। सरकार द्वारा यह जानकारी नहीं मिल सकी कि इन मशीनों का कहां और क्या प्रयोग किया गया है।

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