December 9, 2022

पाकिस्‍तानी बोट पर संदिग्‍ध आतंकी ही थे, तस्‍कर होते तो ब्‍लास्‍ट कर खुदकुशी नहीं करते: रक्षा मंत्री

पोरबंदर से करीब 365 किलोमीटर दूर बीच समुद्र में तटरक्षक बलों की ओर से पाकिस्‍तानी बोट की घेराबंदी किए जाने और फिर उसमें ब्‍लास्‍ट के मामले में रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने सोमवार को कहा कि यदि बोट में सवार लोग तस्‍कर होते तो वे ब्‍लास्‍ट नहीं करते। बोट पर सवार लोग संदिग्‍ध आतंकी ही थे, इसलिए उन लोगों ने ब्‍लास्‍ट कर आत्महत्या कर ली।

रक्षा मंत्री ने आज मीडिया से बातचीत में कहा कि पाकिस्‍तानी बोट में सवार लोग यदि तस्‍कर होते तो फिर वे उसे ब्‍लास्‍ट कर नहीं उड़ाते। ये तस्‍करी का मामला नहीं था। उन्‍होंने कहा कि ये बोट सामान्‍य रास्‍ते से भारतीय जलसीमा में नहीं आई थी। आम तौर पर समुद्री तस्कर भी व्यस्त रास्तों का इस्तेमाल करते हैं। पार्रिकर ने सवालिया लहजे में कहा कि यदि बोट में सवार लोग तस्‍कर होते तो वे फिर पाक एजेंसियों के संपर्क में क्‍यों होते? रक्षा मंत्री ने कहा कि बोट पर सवार लोगों ने जिस तरह आत्महत्या की, जाहिर होता है कि वे आतंकी थे। अगर नौका पर ड्रग्स स्मगलर होते तो वे समर्पण कर देते।

उन्‍होंने कहा कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के पास इस पाकिस्‍तानी बोट के बारे में पूरी पुख्‍ता जानकारी थी। करीब 12-14 घंटे तक बोट पर निगरानी रखी गई थी। उन्‍होंने बोट मामले में बेहतर ढंग से निपटने के लिए भारतीय तटरक्षक बलों की भूमिका की सराहना की। रक्षा मंत्री पार्रिकर ने भारतीय तटरक्षक के साथ ही इस अभियान में शामिल जवानों की प्रशंसा जो ‘बिना अनुमति वाली नौका’ की समय पर सटीक तरीके से घेराबंदी करने के अभियान में शामिल थे जिससे एक संभावित खतरा टल गया। पार्रिकर ने कोस्ट गार्ड की कार्रवाई को उचित समय पर सही कार्रवाई बताया। रक्षा संपदा भवन में राष्ट्रीय रक्षा संस्थान की आधारशि‍ला रखने आए पार्रिकर ने कहा कि खुफिया सूचना पर कोस्ट गार्ड ने जो कार्रवाई की, वह सही समय पर सही कार्रवाई है।

घटना के वक्त तीन बोट होने के सवाल पर रक्षा मंत्री ने कहा कि यह सच है कि वहां दूसरे बोट भी थे, लेकिन वो अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में थे इसलिए उन पर कार्रवाई नहीं की गई। उन्‍होंने आशंका जताई की इस पूरी कवायद के पीछे पाकिस्तान की मंशा पेशावर की घटना से सभी का ध्यान हटाने की है।

पार्रिकर ने यह भी कहा कि यह नाव न तो मछुआरों या ना फिर ड्रग तस्करों के नॉर्मल रूट पर थी। ड्रग तस्कर अक्सर कोस्टगार्ड को चमका देने के लिए बिजी रूट का सहारा लेते हैं, लेकिन यह नाव बिल्कुल अलग रूट पर थी। नाव में आतंकियों के होने का सबसे बड़ा संकेत उनके खुद को उड़ाने से मिलता है। पार्रिकर ने कहा कि अगर वे ड्रग तस्कर होते तो वे ड्रग फेंक देते और सरेंडर करते। ड्रग तस्कर पकड़े जाने पर अक्सर ऐसा ही करते हैं। इससे लगता है कि नाव सवार मन बनाकर आए थे। रक्षा मंत्री ने कहा कि इंटेलिजेंस के इनपुट्स के मुताबिक नाव में सवार लोग पाक एजेंसियों के संपर्क में थे। उन्होंने कहा कि तस्कर कभी भी पाकिस्तान की एजेंसियों के संपर्क में नहीं होते हैं। इस नाव के बारे में इंटेलिजेंस इनपुट्स बिल्कुल स्पष्ट थे। नाव सवारों की इंटरसेप्ट की गई बातचीत बेहद संदिग्ध है। वे आपस में माल पहुंचा देने की बात कर रहे थे। रक्षा मंत्री ने कहा कि इस नाव के अलावा उस रात एक दूसरी नाव भी थी, लेकिन वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में थी।

गौर हो कि 31 दिसंबर को अरब सागर में भारत-पाक समुद्री सीमा के पास विस्फोटकों से भरी एक संदिग्ध बोट में धमाका हुआ। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, यह 26 /11 जैसा आतंकी हमला दोहराने की पाकिस्तानी सेना की साजिश थी। पाकिस्तान की ओर से घुसी बोट पर सवार लोग कराची और थाईलैंड में बैठे लोगों के लगातार संपर्क में थे। उनकी इस बातचीत को एजेंसियों ने रिकॉर्ड कर लिया, जिससे पाकिस्तानी सेना की साजिश का खुलासा हुआ। भारतीय तटरक्षकों ने अरब सागर में आधी रात में बीच समुद्र में की गई एक कार्रवाई में मछली पकड़ने वाली एक संदिग्ध पाकिस्तानी नौका को घेर लिया था जिसमें विस्फोटक भरा हुआ था। इस घेराबंदी के बाद नौका में अचानक विस्फोट के बाद आग लग गई जिसके बाद उस पर सवार चार लोग नौका के साथ ही डूब गए। यह घटना 31 दिसम्बर की रात पोरबंदर से करीब 365 किलोमीटर दूर बीच समुद्र में हुई। इसको लेकर ऐसी अटकलें लगाई गई कि यह घटना 2008 के मुम्बई आतंकवादी हमले जैसी ही थी लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। सटीक गुप्तचर सूचना के आधार पर आधी रात में संदिग्ध नौका को रोकने लिए यह कार्रवाई तटरक्षक जहाजों और विमान द्वारा की गई। अरब सागर में भारतीय तटरक्षक बल द्वारा पीछा किये जाने के बाद विस्फोट करने वाली रहस्यमयी नौका के मलबे और उस पर सवार चार लोगों के शव खोजने का काम चल रहा है क्योंकि यह उन लोगों के इरादे के बारे में निष्कर्ष पर पहुंचने में जांचकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

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