December 9, 2022

पॉलीथिन उपयोग पर नहीं लग रहा प्रतिबंध-लोगों में है जागरूकता की कमी

अनूपपुर। कम माइक्रॉन के पॉलीथिन के इस्तेमाल पर बैन लगाने के साथ पॉलीथिन विक्रेताओं को कुछ खास मानकों के तहत नियमावली के साथ पॉलीथिन बेचने का अधिकार दिया गया है, लेकिन नियम के विपरीत शहर में धडल्ले से कम माईक्रॉन की रंग-बिरंगी पॉलीथिन की बिक्री जारी है। शासन की ओर से जारी आदेशों के मुताबिक ४० माईक्रॉन से कम क्षमता वाला पॉलीथिन नही बेचा जा सकता है। इसके साथ-साथ कई अहम शर्ते पॉलीथिन की बिक्री पर लगाई गई। वहीं जिला प्रशासन द्वारा भी आम लोगों से कम माईक्रॉन के पॉलीथिन के उपयोग न करने की अपील भी की जाती रही, लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण प्रशासन की अपील को नजर अंदाज किया जा रहा है। नगर पालिका, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व जिला प्रशासन की अनदेखी के चलते जिलेभर में खुलेआम अवैध पॉलीथिन का कारोबार व उपयोग जारी है। शहर के विभिन्न इलाकों में इसका जायजा लिया गया तो अधिकतर जगहों पर अवैध पॉलीथिन में ही सामान बिकता नजर आया।

नहीं लग रही पाबंदी

विगत वर्ष शासकीय आदेशों के अमल की कागजी खानापूर्ति के लिए नगरीय प्रशासन ने सब्जी मंडी सहित अन्य किराने की दुकानों पर बिक रही अमानक पॉलीथिन के खिलाफ कार्यवाही की थी। इस दौरान कुछ पॉलीथिन जब्त भी किए गए थे साथ ही कुछ दिनों तक शहर में पॉलीथिन बेचने को लेकर दुकानों में उहापोह की स्थिति भी बनी रही। लेकिन नगर में अनेदखी के चलते पुन: दुकानदार खुले तौर पर अमानक पॉलीथिनों का उपयोग करने लगे। सब्जी मंडी से लेकर चिकन की दुकानों तक एवं निजी राशन की दुकानों पर अवैध मानकों वाले पॉलीथिन में बेधड़क सामग्री बेची जाने लगी। जहां इसके उपयोग के बाद शहर के गली कूचों तथा खाली मैदानों में इसकी भरमार लगा दी जाती है। चूंकि इसे रिसायकल नहीं किया जा सकता, कचरा बिनने वाला भी इन पॉलीथिनों को छोड़ देता है। जिससे आसपास के क्षेत्रों में दुर्गंध व्याप्त रहती है। वहीं इन पॉलीथिनों में खाने के अवशेष भरे होने के कारण आवारा मवेशी भी खा-खाकर बीमार होकर मर रहे हैं।
चाईना पॉलीथिन का हो रहा ज्यादा उपयोग
शहर के विभिन्न दुकानों में चाईना पॉलीथिन की मांग अधिक है। क्योंकि चाईना पॉलीथिन सस्ती होने के साथ अधिक मजबूत मानी जाती है। दुकानदारों का कहना है कि यह पतली व मजबूत होती है इसके अलावा खरीददारी के समय वजन में भी अधिक आती है। वैसे इंडियन पॉलीथिन की कीमत १२० से १५० रूपये प्रति किलोग्राम मानी जाती है जबकि चाइनीज १०० रूपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध हो जाती है। इसके अलावा शहर के कुछ शोरूम संचालक व नामी दुकानदारों ने अपनी पहचान के लिए अवैध पॉलीथिन पर दुकानों का नाम भी लिखवाया है जिसकी बिक्री खुलेआम की जा रही है न तो इन पॉलीथिन में कंपनी का नाम नजर आता है और न ही पॉलीथिन में निर्माता कंपनी का नाम व पता ही दिखाई देता है। दुकानदार भी सामान उन्ही विशैली पॉलीथिनों में भर कर दे रहे हैं।

ये हैं नियम

सरकार द्वारा जारी आदेश में ४० मॉइक्रान से कम मोटाई वाले पॉलीथिन की बाजार में बिक्री पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया गया है। वहीं जिन पॉलीथिन की बिक्री जारी है उस पर निर्माता कंपनी का नाम एवं पता होना अनिवार्य है। साथ ही ऐसे पॉलीथिन को एकत्रित कर उसे नगरीय प्रशासन द्वारा निष्पादित स्थल पर सड़ा देने के निर्देश दिए गए है लेकिन इसके बावजूद ४० मॉइक्रान से अधिक मोटाई वाले पॉलीथिन की जगह कम मानकों वाले पॉलीथिन की बिक्री अधिक हो रही है।

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