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प्रेम विवाह में कुछ मामलो में फेरे लेना जरुरी नहीं…एड्वोकेट भानु  कतपालिया

प्रेम विवाह में कुछ मामलो में फेरे लेना जरुरी नहीं…एड्वोकेट भानु कतपालिया

नई दिल्ली आजकल युवाओ में अपनी पसंद की शादी करने ही एक होड़ सी लगी है और इसी के चलते प्रेमी युगल अक्सर अपने परिवारो को छोड़ घर से भाग जाते है,इन मामलो में अक्सर ही कई बार कम उम्र की लड़की होने के कारण लड़की के परिजन लड़के के खिलाफ fir दर्ज करा देते हो जिसके चलते पास्को व् अन्य धाराओ में मामले की गंम्भीरता और प्रकार को देखते हुये लड़के पर दर्ज किये जाते है कई मामलो में लड़की के बयानों के आधार और शादी के पुख्ता सबूतो के आधार पर कुछ राहत जरूर मिलती है लेकिन कई मामलो में शादी के बाद भी लड़के को जेल की हवा खानी पड़ जाती है।क्योंकि लड़की के नाबालिक होने की वजह से वह गुनाह की श्रेणी में आता है जिसके तहत बहला फुसलाकर बलात्कार व् किडनैपिंग जैसी संगीन धाराओ में आरोपी को जेल जाना पड़ता है।ऐसे ही एक उलझे हुये मामले के बारे में जाने माने एड्वोकेट भानु कतपालिया ने अपना एक्सपीरियंस शेयर किया उन्होंने बताया की हाल ही में उनके पास एक मामला आया है जिसमे एक बालिग़ मद्रासी फ़ैमली के युवक और शिख फ़ैमली की लड़की ने घर से भागकर शादी कर ली लेकिन लड़की के भागने के वक्त वह नाबालिक थी जिसकी वजह से उसके पिता ने लड़के के खिलाफ बलात्कार और किडनैपिंग जैसी धाराओ में मामला दर्ज करा दिया था लड़का और लड़की काफी महीनो तक घर से बहार ही रहे लेकिन जब लड़का वापिस अपने घर उस लड़की के साथ आया तो पुलिस ने धर दबोचा और जेल भेज दिया हालाँकि लड़की के ब्यानो में उसने कहाँ की उसने अपनी मर्जी से उस युवक से शादी की थी इसीके चलते वह अपनी मर्जी से घर से भाग गयी थी बावजूद इसके भी लड़के को जमानत नहीं मिली क्योंकि कोर्ट ने कहा की यह लड़की उसवक्त नाबालिक थी और यह कही शिद्ध नहीं होता की इन्होंने हिन्दू मैरिज एक्ट के तहत फेरे लेकर शादी की है।इसपर कुछ तारीखों के बाद एड्वोकेट भानु कतपालिया ने दोबारा से केस को खंगाला और कई तथ्य चिन्हित किये जैसे की जिस वक्त लड़की घर से भागी थी उसने लड़के को अपने आप को बालिग ही बताया था लेकिन वह नाबालिग थी यह लड़के को नहीं पता था दूसरा की लड़के के हिसांब से उनके समाज में महज मंगल सूत्र ,अंगूठी,और मांग,भर देने भर ही शादी के लिये पर्याप्त् है इसी आधार भानु कतपालिया ने pk मट्टू (एडिशनल शेषन जज )की कोर्ट तीस हजारी में जिरह की और इन तथ्यों से कोर्ट को चिन्हित कराया उन्होंने बताया की लड़की ने अपनी मर्जी से घर से गई थी और शादी की है और लड़के से झूट बोला की वह बालिग है इसलिये बलात्कार और किडनैपिंग दोनों ही धाराओ के लिये मेरा मुवक्किल दोषी नहीं है उन्होंने कोर्ट को यह भी संज्ञान में लाया की 1967 मद्रास संसोधित एक्ट में कई समाजो में सिर्फ मंगल सूत्र,माँग भरना,और अँगूठी पहना और वरमाला पहना देने भर से शादी मान ली जाती है और 1990 हिन्दू मैरिज एक्ट(संशोधित) का सेक्शन 7-A भी यही कहता है इसलिये मेरा मुवक्किल निर्दोष है जिसे जज pk मट्टू की कोर्ट ने तवज्जो देते हुये युवक को राहत देते हुये जामनत दे दी। भानु कतपालिया ने बताया ऐसे मामलो में अक्सर ही युवक दोषी नहीं होते जैसा की इस मामले में है लेकिन आवश्यकता है की लोग सही तरह से न्याय के लिये सही अधिवक्ता का चुनाव कर अपना पक्ष रख पाये और यह जरुरी भी है क्योंकि ऐसे ही कई मामलो में कई युवक अपनी उम्र के वह लम्हे गुजार रहे है जब उनका अपना भविष्य बनाने का समय होता है लेकिन प्यार करना कोई जुर्म नहीं है बशर्ते वह क़ानूनी तोर पर अपने आप को साबित कर सके।
विक्रम गोस्वामी

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