December 9, 2022

बच्चों को संस्थान से रिहाई, स्थानांतरण, बहाली से पहले जारी किए जाएगें आधार कार्ड

दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रधान सचिव डाॅ. सतबीर बेदी ने आज बताया कि जरूरतमंद बच्चों व किशोरों जिन्होने कानून का उल्लंघन किया हो और जिनको सामाजिक सुरक्षा की जरूरत है, के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग 22 संस्थाएं किशोर न्याय कानून 2000, के अंतर्गत चला रहा है जो इन्हें सुरक्षा देंगे। इनमें से 16 किशोर गृह ऐसे बच्चों के लिए हैं, जो आश्रयरहित, लावारिस, घर से भागे हुए तथा अपराध के शिकार रहें है। गैर सरकारी संगठन जो इस तरह के सुधार गृह चला रहे हैं को उपरोक्त कानून की धारा 34, 37 एवं 41 के अंतर्गत पंजीकृत प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है। वर्तमान में ऐसे 51 गैर सरकारी संगठन इस कानून के अंतर्गत आश्रय गृह चला रहे हैं । ऐसे बच्चों को 18 वर्ष की आयु पूरा करने पर समाज की मुख्य धारा में शामिल होने के लिए संघर्ष करना पड़ता है क्योंकि उनके पास व्यक्तिगत पहचान के लिए कोई प्रमाण नहीं होता।

डाॅ. बेदी ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक जागरूकता अभियान की शुरूआत की है जिसमें ऐसे बच्चे जो सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों द्वारा संचालित आश्रय गृहों में रह रहे हैं। उनको इन संस्थानों से छोड़े जाने से पहले ही उनको आधार प्रमाण पत्र मिल सकें, इसके लिए विभाग इन बच्चों के लिए आधार कार्ड बनाने हेतु प्रयासरत है। इन गृहों के सभी अधीक्षकों को आदेश दिया गया है कि वे आधार प्रमाण पत्र जारी करने वाले प्राधिकरण से सम्पर्क कर इन सभी बच्चों को आधार प्रमाण पत्र बनवाएं। इन संस्थानों के अधीक्षकों द्वारा ऐसे बच्चों को आधार प्रमाण पत्र मिलने पर उनके जीवन को एक आधार पहचान मिलेगा जो कि सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है। आधार कार्ड प्राप्त होने से वे अपना चालक प्रमाण पत्र, मतदाता कार्ड, राशन कार्ड बनवा सकेंगें तथा बैंक में भी अपना खाता खुलवा सकेंगें।

संवाददाता वैशाली

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