PHONE : +91-011-23626019
(M) 09811186005
Email : crimehilore@gmail.com ,
editor.crimehilore@gmail.com


Breaking News
बड़े बैंक लोन घोटाले और कर्ज माफ़ी का खेल

बड़े बैंक लोन घोटाले और कर्ज माफ़ी का खेल

अंततः उच्चतम न्यायालय ने 500 करोड़ से अधिक का लोन लेने वाले डिफाल्टरों की सूची सार्वजानिक करने का आदेश दिया है। ऐसा बेंको द्वारा एक लाख करोड़ से अधिक के लोन नॉन परफॉर्मिंग एसेट यानि कर्ज माफ़ी के दायरे में डालने के बाद किया है।
सोनिया-मनमोहन-चिदंबरम- प्रणव की चोकड़ी ने बर्ष 2004 से लेकर 2013 के बीच देश के बड़े औधोगिक घरानों और अपने चहेतों को 14 लाख करोड़ से अधिक के लोन बेंको द्वारा बंटवाए। ये लोन फर्जी बेलेंस शीट, झूठे कागजो और गलत तथ्यों के आधार पर दिए गए थे। देश भर के औधोगिक घरानों ने खनन के कैप्टिव माइनिंग के अधिकार पत्र को अपनी मुख्य बैलेन्स शीट में जोड़ कर अपनी औकात कई गुना तक ज्यादा दिखायी। कैप्टिव माइनिंग का अधिकार , मतलब आपको एक निश्चित मात्रा तक माइनिंग करने का अधिकार मगर मालिक सरकार ही रहेगी। खान में एक लाख करोड़ का माल है किंतु आपको 5000 करोड़ तक खनन का अधिकार दिया गया। ओद्योगिक घरानों ने अपने खातों में खान की मूल कीमत जुड़ी दिखायी और अपनी बेलेंस शीट फुला ली। रातोंरात जब कंपनी की औकात कई गुना बढ़ गयी तो उसके शेयर भी कई गुना चढ़ गए और बुरी तरह कमाया गया। इसके बाद बेंको से सांठगांठ कर चोकड़ी की मेहरबानी से मोटे लोन लिए गए और डकार लिये गए। यह पैसा जमीनों, सोने, हीरे, विदेशो में फर्जी कंपनियां खोल बाहर भेजने, हवाला से बाहर फर्जी आयत व निर्यात के बहाने सफ़ेद करने, माल, सोसायटी बनाने कई गुना दामो में बेचने के खेल में लगा। इसी का परिणाम यूपीए 2 के समय खुले टू जी, कोयला, खनन और अन्य सैकड़ो घोटाले थे। यानि सच्चाई यह है कि बेंको का लगभग 10 से 12 लाख करोड़ डूब चूका है और सच धीरे धीरे सामने लाया जा रहा है। काले धन पर बने बिशेष जाँच दल ने इन 10 बर्षों में देश से 35 लाख करोड़ रूपये बाहर निकल जाने की बात कर जाँच शुरू की है।
यू पी ए की हार के बाद आयी मोदी सरकार के लिए उपयुक्त होता के वे देश की अर्थव्यवस्था पर एक श्वेत पत्र पेश कर कोंग्रेस पार्टी की सरकार द्वारा की गयी अर्थव्यवस्था की बर्बादी की वास्तविक तस्वीर देश के सामने रखती, किंतू वित्त मंत्री अरुण जेटली ऐसा करने से बचते रहे और आज कॉंग्रेस अपने किये पापों को मोदी सरकार के मत्थे मड साफ़ बच निकलने का खेल खेलने जा रही है। असहिष्णुता, किसान, सेनिक और दलित आदि के मुद्दों से अपना खेल फिर से खड़ा करने के बाद कॉंग्रेस इस मुद्दे को शिद्दत से उठाने की फ़िराक में है। देखने की बात यह है कि जे एन यू के विवाद के बाद राष्ट्रवाद के उभरे मुद्दे के कारण बैकफुट पर आ चुकी कॉंग्रेस क्या सच में इस मुद्दे को केश करा पायेगी या अन्ततः आक्रामक रुख में आयी मोदी सरकार पलट वार कर कॉंग्रेस को ही घेर लेगी।

ShareShare on Google+0Pin on Pinterest0Share on LinkedIn0Share on Reddit0Share on TumblrTweet about this on Twitter0Share on Facebook0Print this pageEmail this to someone

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*


You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>