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भारतीय रेलवे ने कोविड-19 वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए बड़े पैमाने पर अपनी पूरी मशीनरी को और भी अधिक तेज किया

भारतीय रेलवे ने कोविड-19 वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए बड़े पैमाने पर अपनी पूरी मशीनरी को और भी अधिक तेज किया

भारतीय रेलवे ने ‘कोविड-19’ वायरस के संक्रमण की रोकथाम हेतु व्यापक उपाय करने के लिए बड़े पैमाने पर अपनी पूरी मशीनरी को और भी अधिक तेज कर दिया है। रेल और वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगड़ी एवं रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव 5 मार्च 2020 से ही अपनी पूरी तैयारियों की नियमित रूप से समीक्षा कर रहे हैं। महाप्रबंधकों (जीएम) और रेलवे बोर्ड के प्रमुख अधिकारियों को शामिल करते हुए हर दिन संवाद आयोजित किए जा रहे। इससे संबंधित प्रयासों में समन्वय स्‍थापित करने, निर्देश देने, आवश्‍यक सुझाव प्राप्‍त करने, प्रगति की समीक्षा करने और प्रभावकारी संचार को निरंतर बनाए रखने में मदद मिलती है।

पूरे देश में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए चौबीसों घंटे मालगाड़ियों का निर्बाध परिचालन – सप्‍लाई चेन को निरंतर चालू रखने के लिए 24 मार्च 2020 से लेकर 02 अप्रैल 2020 तक 4 लाख से भी अधिक वैगनों ने आपूर्ति की। इनमें से 2.23 लाख से अधिक वैगनों ने देश भर में खाद्यान्न, नमक, चीनी, दूध, खाद्य तेल, प्याज, फल-सब्जियों, पेट्रोलियम उत्पादों, कोयला एवं उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की।

भारतीय रेलवे के कर्मचारी चौबीसों घंटे विभिन्न गुड्स-शेड, स्टेशनों और नियंत्रण कार्यालयों में काम कर रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पूरे देश में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित न हो। लोकोमोटिव पायलट और गार्ड कुशलतापूर्वक ट्रेनों को चला रहे हैं। ट्रैक, सिग्नलिंग, ओवरहेड उपकरण, लोकोमोटिव, कोच और वैगन के प्रमुख रखरखाव कर्मचारी मालगाड़ियों का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए बिल्‍कुल अच्छी अवस्‍था में बुनियादी ढांचागत सुविधाओं को बनाए हुए हैं। मालगाड़ियों के संचालन और गुड्स-शेड/नियंत्रण कक्ष सेट अप की पार्सल साइडिंग में रेक की लोडिंग/अनलोडिंग में जोनल रेलवे को हो रही समस्‍याओं को रेलवे अधिकारियों के माध्यम से वास्तविक समय पर उठाने के लिए एक संस्थागत व्‍यवस्‍था गृह मंत्रालय (एमएचए) द्वारा की गई है, जिसे एमएचए के कंट्रोल रूम के एक भाग के रूप में स्‍थापित किया गया है।

पार्सल गाड़ियों का संचालन – कोविड-19 के मद्देनजर किए गए लॉकडाउन के दौरान छोटे पार्सल साइज में जरूरी सामान जैसे कि चिकित्‍सा आपूर्ति, चिकित्‍सा उपकरणों, खाद्य पदार्थों, इत्‍यादि की ढुलाई बहुत आवश्‍यक होने वाली है। इस महत्वपूर्ण आवश्यकता को पूरा करने के लिए भारतीय रेलवे ने रेलवे पार्सल वैन को ई-कॉमर्स संस्थाओं और राज्य सरकारों सहित अन्य ग्राहकों की त्वरित व्‍यापक ढुलाई आवश्यकताओं के लिए उपलब्ध कराया है।

विलंब शुल्क और गोदी-शुल्‍क संबंधी नियमों में ढील: कोरोना वायरस को एक प्राकृतिक आपदा के रूप में मानते हुए एवं अप्रत्याशित स्थिति से संबंधित अनुच्‍छेद का उपयोग करके विलंब शुल्क और गोदी-शुल्‍क संबंधी नियमों में ढील दी गई है।

खाली कंटेनरों और फ्लैट कंटेनरों की आवाजाही पर कोई ढुलाई शुल्क नहीं: माल के सुचारू प्रवाह को बनाए रखने के लिए खाली कंटेनरों और फ्लैट कंटेनरों की आवाजाही पर ढुलाई शुल्क को 24 मार्च 2020 से लेकर 30 अप्रैल 2020 तक हटा दिया गया है।

केंद्रीय नियंत्रण प्रकोष्‍ठ की स्थापना: रेलवे प्रशासन एवं आम जनता के बीच सूचना और सुझावों के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए 27 मार्च 2020 से निदेशक स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में रेलवे बोर्ड में केंद्रीय नियंत्रण प्रकोष्‍ठ की स्थापना की गई है। नियंत्रण प्रकोष्‍ठ का संचालन चौबीसों घंटे किया जाता है, ताकि रेलवे हेल्पलाइन 139 और 138 पर प्राप्त होने वाली कॉल और railmadad@rb.railnet.gov.in पर आने वाली ईमेल की निगरानी की जा सके और इसके साथ ही सोशल मीडिया पर जारी ट्रेंड पर भी पैनी नजर रखी जा सके। इसका उद्देश्‍य संचार सुनिश्चित करना और समय पर ठोस कदम उठाकर रेलवे ग्राहकों एवं अन्य लोगों की कठिनाइयों को दूर करना है।

क्‍वारंटाइन के लिए 11000 बेड अलग रखने के अलावा 17 विशेष अस्पतालों और 33 अस्पताल ब्लॉकों में तकरीबन 5000 बेड को खासकर कोविड-19 रोगियों के उपचार के लिए निर्दिष्‍ट किया गया है। इन अस्पतालों और ब्लॉकों को इस उद्देश्य के लिए तैयार किया जा रहा है।

क्‍वारंटाइन/आइसोलेशन केंद्रों के रूप में 5000 डिब्बों (कोच) का रूपांतरण : भारतीय रेलवे कोविड-19 के लिए क्‍वारंटाइन/आइसोलेशन केंद्रों के रूप में काम करने के लिए देश भर में 80000 बेड वाले 5000 ट्रेन डिब्बों को रूपांतरित कर रही है। डिजाइनिंग हो गई है, प्रोटोटाइप को स्वीकृति मिल गई है और जोनल रेलवे द्वारा रूपांतरण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आवश्यकता पड़ने पर रूपांतरण के लिए 3.2 लाख बेड वाले कुल 20000 कोचों की पहचान की गई है।

चिकित्सा उपकरण, पीपीई और वेंटिलेटर की खरीद: कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में पर्याप्त संख्या में निजी सुरक्षा उपकरणों (पीपीई), वेंटिलेटर इत्‍यादि की उपलब्धता आवश्‍यक होगी। वेंटिलेटर, पीपीई और चिकित्सा उपकरणों की खरीद संबंधी उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए रेलवे जोन और उत्पादन इकाइयों द्वारा आवश्‍यक कदम उठाए गए हैं।

कार्य स्थलों पर कोरोना की रोकथाम के उपाय: चूंकि आवश्यक वस्‍तुओं की आपूर्ति को बनाए रखने के लिए माल ढुलाई का संचालन चौबीसों घंटे हो रहा है, इसलिए संचालन और रखरखाव कर्मचारी चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। इन कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके मनोबल को बढ़ाने के लिए सभी कार्यस्थलों पर निम्नलिखित को सुनिश्चित किया जा रहा है:

ड्यूटी पर आने वाले सभी कर्मचारियों को मास्क और हैंड सैनिटाइजर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ठेके पर काम कर रहे कामगारों के लिए भी ये सुनिश्चित किए जा रहे हैं। रेलवे कार्यशालाएं, कोचिंग डिपो और अस्पताल समय की मांग को ध्‍यान में रखते हुए पूरक आपूर्ति करने के लिए स्थानीय स्तर पर सैनिटाइजर और मास्क का उत्पादन कर रहे हैं। सभी कार्य स्थलों पर साबुन, पानी और कपड़े धोने की सुविधाएं दी जा रही हैं। स्थानीय नवाचारों के जरिए कपड़े धोने की ऐसी सुविधाएं प्रदान की गई हैं जिनमें हाथों के इस्‍तेमाल की आवश्‍यकता नहीं होती है। सामाजिक दूरी बनाए रखना सुनिश्चित किया जा रहा है। इस संबंध में ट्रैकमैन और लोकोमोटिव पायलट जैसे सभी कर्मचारियों के बीच नियमित रूप से जागरूकता बढ़ाई जा रही है।

केंद्र सरकार के सभी कर्मचारियों को रेलवे स्वास्थ्य सेवाएं दी गईं: रेलवे के अस्पतालों/स्वास्थ्य केंद्रों पर अपने पहचान पत्र दिखाने पर देश भर में केंद्र सरकार के सभी कर्मचारियों को रेलवे स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

रेलवे कर्मचारियों द्वारा ‘पीएम केयर्स फंड’ में 151 करोड़ रुपये का योगदान: रेलवे कर्मचारी 1 दिन का वेतन पीएम केयर्स फंड में दान करेंगे जो 151 करोड़ रुपये के बराबर है।

सहायक चिकित्‍सा कर्मियों (पैरा मेडिकल स्टाफ) की सेवाएं अनुबंध पर ली जा रही हैं: सामान्य प्रबंधकों/सीएओ/ डीआरएम को स्थिति से निपटने के लिए कार्य बल के पूरक के रूप में सहायक चिकित्‍सा कर्मियों (पैरा मेडिकल स्टाफ) की सेवाएं अनुबंध पर लेने का अधिकार दिया गया है।

आईआरसीटीसी बेस किचन द्वारा जरूरतमंदों को मुफ्त भोजन की आपूर्ति: आईआरसीटीसी बेस किचन 28 मार्च 2020 से ही आरपीएफ कर्मियों की मदद से जरूरतमंदों को मुफ्त भोजन प्रदान कर रहे हैं। देशभर में 25 स्थानों पर जरूरतमंदों को लगभग 2.25 लाख भोजन परोसे गए हैं।

ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को डिजिटल आधारित भुगतान: आईटी आधारित सुदृढ़ डिजिटल प्रणाली का उपयोग कर सुविधाजनक ढंग से सभी आवश्यक भुगतान किए गए हैं। अपेक्षा से काफी कम कर्मचारी रहने के बावजूद डिलीवरी सुनिश्चित की गई है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों को कोई कठिनाई न हो, अनुबंध से जुड़े सभी आवश्यक भुगतान नियमित रूप से किए जा रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक रूप से बिल भुगतान को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रक्रिया सरल कर दी गई है।

अनुबंधित श्रमिकों को भुगतान और रहने की व्यवस्था: हाउसकीपिंग/सेवा अनुबंधों में अनुबंधित/आउटसोर्स श्रमिकों को नियमित भुगतान लॉकडाउन अवधि के दौरान सुनिश्चित किया जा रहा है। लॉकडाउन में फंसे विभागीय एवं अनुबंधित दोनों ही तरह के कर्मचारियों के रहने और खाने की व्यवस्था की गई है।

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