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मरीज के तीमारदारों की खातिर सीमा सुरक्षा बल ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल में की ‘‘रैन बसेरे’’ की स्थापना

मरीज के तीमारदारों की खातिर सीमा सुरक्षा बल ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल में की ‘‘रैन बसेरे’’ की स्थापना

राजधानी नई दिल्ली के डाॅ0 राम मनोहर लोहिया अस्पताल के प्रांगण में सीमा सुरक्षा बल ने मरीजों के तीमारदारों की खातिर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में ‘‘रैन बसेरे’’ की स्थापना कर समाज सेवा के क्षेत्र में एक और नया अध्याय जोड़ा है।

21 दिसंबर को , डाॅ0 राम मनोहर लोहिया अस्पताल के वार्ड नम्बर 13 के समीप रेणु शर्मा, अध्यक्षा, बावा (बी.एस.एफ.वाइव्स वेलफेयर एसोसियेशन) के कर कमलों से इस रैन बसेरे का उद्घाटन किया गया।

दिल्ली की कड़कड़ाती ठंडियों में, जहां कि कभी-कभी पारा शून्य से भी नीचे चला जाता है, इस रैन बसेरे से डाॅ0 राम मनोहर लोहिया अस्पताल, नई दिल्ली में इलाज के लिये आये या भर्ती हुए मरीजों की देखभाल करने वाले उन परिजनों को एक सुविधाजनक आश्रय मिलेगा, जिनके पास दिल्ली में रहने का आश्रय नहीं है।

इस रैन बसेरे की स्थापना के तहत सीमा सुरक्षा बल द्वारा राम मनोेहर लोहिया अस्पताल में कुल 06 टेंट लगाये गये हैं, जिनमें एक साथ करीब 35 से भी अधिक लोग रह सकेंगे। इन रैन बसेरों में ठहरने वालों के लिये चारपाईयों का तो इंतजाम तो है ही, इसके अतिरिक्त कंबल व गद्दे भी प्रदान किये गये हैं। टेंट को गर्म रखने के लिये एक ओर जहां रूम हीटर की भी व्यवस्था की गई है, वहीं मरीजों के परिजनों के मनोरंजन के लिये टेलिविजन सेट भी लगाये गये हैं।

सीमा सुरक्षा बल की तरफ से लगाया गया यह रैन बसेरा जाड़े भर अपनी सेवाएं प्रदान करता रहेगा।

विदित हो कि सीमा सुरक्षा बल द्वारा प्रति वर्ष इन रैन बसेरों का संचालन किया जाता रहा है, और इनके माध्यम से आम जनों को सेवाएं प्रदान की जाती रही हैं। सन् 2014 में बल द्वारा भिन्न – भिन्न स्थानों पर स्थापित ऐसे ही भिन्न-भिन्न रैन बसेरों के माध्यम से 1000 से भी ज्यादा लोग लाभान्वित हुए थे, जिन्होंने सीमा सुरक्षा बल की इस सेवा भावना की तहे-दिल से तारीफ की थी।

इस अवसर लोहिया अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक, प्रशासक, स्टाॅफ और सीमा सुरक्षा बल के अधिकारी, जवानों सहित बावा पदाधिकारी और बावा सदस्याएं भी अच्छी-खासी संख्या में मौजूद थीं। इस अवसर पर आम नागरिकों की भी प्रभावकारी उपस्थिति थी।

इस अवसर पर दिये गये अपने संबोधन भाषण में रेणु शर्मा ने रैन बसेरे की स्थापना मेें सहयोग के लिये अस्पताल प्रशासन की जमकर सराहना की और सीमा सुरक्षा बल को सेवा का अवसर प्रदान करने के लिये उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया।

‘‘बावा‘‘

वस्तुतः बावा बावा (बी.एस.एफ.वाइव्स वेलफेयर एसोसियेशन) सीमा सुरक्षा बल का आनुशांगिक संगठन है जो सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों व जवानों के परिवारों की भलाई और उनके कल्याण के लिये दिन-रात कार्य किया करता है। उनकी भलाई के अतिरिक्त यह संगठन उनके बेहतरीन जीवन स्तर के लिये भी निरंतर प्रयासरत रहा करता है। अपने प्रयासों और कार्यों से इस संगठन ने सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों व जवानों के परिवारों के हित में अनेक बेहतरीन योजनाओं और कार्यों को तो संपादित किया ही है, इसके अतिरिक्त संवाद का एक अनूठा लाभदायक मंच भी उपलब्ध भी कराया है।

इस संगठन की स्थापना सन् 1992 में हुई थी।

ज्ञात हो कि सीमा सुरक्षा बल के कार्मिक अत्यन्त ही विषम एवं जटिल परिस्थितियों में, घर परिवार से लगातार दूर रहकर अपने कर्तव्यों को अंजाम देते हैं और नाना प्रकार की चुनौतियों का सामना करते हंै। इस वजह से उनके परिवार, विशेषकर कर उनकी पत्नियों एवं बच्चों को भिन्न-भिन्न प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ता है।
बल के कार्मिकों की पत्नियों के ऊपर कार्मिकों के परिवार की देखरेख एवं बच्चों के लालन-पालन का दोहरा दायित्व होता है। उनमें से बहुतों रोज-रोज की घरेलू, पारिवारिक और सामाजिक समस्याओं से जुझने में अच्छी खासी म’ाक्कत करनी पड़ती है । कई बार समस्याओं का हल उन्हें समझ में ही नहीं आता। साथ ही अपेक्षाकृत कुछ कम उच्च शिक्षित महिलाओं को ये भी पता नहीं होता कि सरकारी संस्थाओं द्वारा प्रदत्त उन सुविधाओं का लाभ वे कैसे उठायंे, जो उनके लिये ही संचालित हैं। ऐसे में ‘बावा’ कार्मिकों की पत्नियों, विधवाओं एवं साथ ही उनके अन्य आश्रितों के लिये सरकारी संस्थाओं और उनके बीच सेतु का कार्य करता है।
वस्तुतः ‘बावा’-ऐसा गैर लाभकारी संस्थान है, जिसका मुख्य कार्य प्रहरी संगिनियों की कार्य कुशलता में वृद्धि हेतु उन्हें प्रशिक्षण एवं मदद प्रदान करना है; मसलनः- बच्चों की शिक्षा- दीक्षा में मदद, नवीनतम तकनीकी जानकारियों से रू-ब-रू कराना ,कैरियर परामर्श, स्वास्थ्य, लाइफ स्टाइल के बारे में समुचित मार्गदर्शन , विधवाओं का पुनर्वास एवं ऐसी ही अनेक समस्याओं के निपटारे में हर संभव मदद प्रदान करना इत्यादि, और ऐसा इसलिये ताकि प्रहरी संगिनियां अपने-आप को ना एकाकी समझें और ना ही निरूपाय ।

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