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राष्ट्रीय राजधानी संशोधन कानून 2021 भारत के संविधान की अवहेलना है- सत्येंद्र जैन

राष्ट्रीय राजधानी संशोधन कानून 2021 भारत के संविधान की अवहेलना है- सत्येंद्र जैन

दिल्ली विधानसभा में शुक्रवार को जीएनसीटीडी संशोधन कानून 2021 पर चर्चा हुई। जिसमें दिल्ली के गृह मंत्री और आम आदमी पार्टी के विधायकों ने जीएनसीटीडी संशोधन कानून 2021 पर विरोध प्रकट किया। चर्चा के दौरान दिल्ली के गृह मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी संशोधन कानून 2021 भारत के संविधान की अवहेलना है। विधायक राघव चड्ढा ने कहा कि भाजपा प्रत्यक्ष रूप से दिल्ली सरकार को नहीं चला सकती तो अब अप्रत्यक्ष रूप से सरकार पर कब्जा करना चाहती है। जीएनसीटीडी एक्ट में संशोधन ना केवल सुप्रीम कोर्ट के 2018 के आदेश के खिलाफ है बल्कि संविधान की मूल भावना के भी खिलाफ है। यह संघीय ढांचे की एक तरह से हत्या है। विधायक आतिशी ने कहा कि भाजपा ने इस बार सिर्फ दिल्ली की सरकार की ताकत को छीनने का काम नहीं किया बल्कि दिल्ली विधानसभा की ताकत को छीनने का भी काम किया है। विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा को स्पष्ट हो गया है कि वो दिल्ली की सत्ता में नहीं आने वाली, इस वजह से भाजपा चोर दरवाजे से दिल्ली की सत्ता को हथियाने की कोशिश कर रही है।

दिल्ली के गृह मंत्री सत्येंद्र जैन ने दिल्ली विधानसभा पटल पर केंद्र सरकार द्वारा पारित राष्ट्रीय राजधानी संशोधन कानून 2021 पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी संशोधन कानून 2021 भारत के संविधान की अवहेलना है और इसे लागू कर केंद्र सरकार एक बार फिर से अंग्रेजों का वाइसरोय कल्चर लाना चाहती है। सत्येंद्र जैन ने आगे कहा कि राष्ट्रीय राजधानी संशोधन कानून 2021 आगे चलकर भाजपा सरकार जब केंद्र में नहीं होगी तब उनके विपरीत भी काम कर सकता है। उन्होंने आगे कहा कि मंत्रिमंडल के दिन-प्रतिदन के कार्यों के लिए किसी के हस्ताक्षर की ज़रूरत नहीं होती। सत्येंद्र जैन ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में ये साफ-साफ कहा था कि एल जी के पास दिल्ली के कैबिनेट निर्णयों को भेजने की बलकुल ज़रूरत नहीं है। इसके आलावा उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णयों में “ऐड एंड एडवाइस” की अच्छे से व्याख्या की है।

विधायक राघव चड्ढा ने कहा कि भाजपा को 2015 और 2020 में दिल्ली चुनावों में मुंह की खानी पड़ी है। दशकों से यह दिल्ली की सत्ता नहीं चला पा रहे। जब इन्हें यह बात समझ में आ गई कि प्रत्यक्ष रूप से सरकार नहीं चला सकते तो यह अब अप्रत्यक्ष रूप से सरकार पर कब्जा करना चाहते हैं। केंद्र सरकार का संशोधन ना केवल सुप्रीम कोर्ट के 2018 के आदेश के खिलाफ ही नहीं है बल्कि संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। यह संघीय ढांचे की एक तरह से हत्या है।

उन्होंने कहा कि जबसे दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार बनी है तभी से ही भाजपा के लोगों ने उप राज्यपाल के माध्यम से रोजमर्रा के कार्यों में हस्तक्षेप करने का काम शुरू किया। तब सुप्रीमकोर्ट के पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने 2018 में ऐतिहासिक फैसला देते हुए कहा कि दिल्ली को चुनी हुई सरकार चलाएगी। उप राज्यपाल किसी भी प्रकार से चुनी हुई सरकार के काम में हस्तक्षेप नहीं कर सकते। जब भाजपा सुप्रीमकोर्ट में हार गई तो उस आदेश को रिवर्स करने के लिए इन्होंने आजाद भारत के इतिहास में सबसे बड़ा असंवैधानिक बिल संसद में पेश किया। बहुमत का गलत इस्तेमाल करते हुए उसे पास कराया और दिल्ली में लोकतंत्र की हत्या कर दी।

राघव चड्ढा ने कहा कि सेक्शन 21 में कहा है कि चुनी हुई सरकार की जगह पावर उप राज्यपाल के पास होगी, यानि कि चुनी हुई सरकार का कोई मतलब नहीं होगा। दिल्ली की दो करोड़ जनता से वोट का अधिकार छीन लिया गया है। सेक्शन 33 में कहा है कि दिल्ली विधानसभा जो भी नियम बनाएगी वो लोकसभा के नियम के समान होने चाहियें। यदि लोकसभा के कानूनों के हिसाब से नहीं होंगे तो उनकी कोई वैल्यू नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा की समिति किसी भी प्राइवेट व्यक्ति को भी बुलाने की शक्ति रखती है। दिल्ली के किसी भी विषय पर बातचीत की जा सकती है। भले विधानसभा जमीन और कानून व्यवस्था पर कोई कानून नहीं बना सकती। लेकिन समितियां इन विषयों से संबंधित किसी भी मसले पर सबको बुला सकती हैं। हमारी समितियां शक्तिशाली हैं।

विधायक राघव ने कहा कि अमेडमेंट कानून से आपत्ति है कि इन्होंने जीएनसीटीडी एक्ट के सेक्शन 25 को संशोधित कर दिया। उसमें संशोधन कर कहा गया है कि विधानसभा द्वारा पास किया गया बिल दुर्घटनात्मक रूप से भी किसी रिजर्व मुद्दे को छूता है तो उप राज्यपाल अपने पास विचाराधीन रख सकते हैं। सुप्रीमकोर्ट का आदेश कहता है कि निर्णय लेने की शक्ति मंत्रीमंडल के पास क्योंकि वो प्रत्यक्ष रूप से दिल्ली की जनता द्वारा चुने गए हैं। दूसरा उप राज्यपाल के पास अपनी तरफ से कोई भी निर्णय लेने की कोई शक्ति नहीं है। मंत्रीमंडल का जो फैसला है उसपर हस्ताक्षर करने पडेंगे।

विधायक आतिशी ने कहा कि भाजपा का लोकतंत्र में विश्वास नहीं है। इनका मानना है कि लोकंतात्रिक चुनावों में हम सरकार बना लेंगे। यदि हम नहीं भी जीते तो उलटे-सीधे तरीके से हम सरकार बनाएंगे। भाजपा का ट्रेक रिकॉर्ड राज्य दर राज्य देख सकते। भाजपा को कोई फर्क नहीं पड़ता है कि वो चुनाव जीते या नहीं जीते। दिल्ली में 2015 में आम आदमी पार्टी की प्रचंड बहुमत की सरकार बनी। ऐसे में ये कितने विधायक खरीदते। दिल्ली में विधायक खरीदने वाला मॉडल नहीं अपना पाए जो दूसरे राज्यों में अपनाते हैं। ऐसे में इन्होंने 2015 में दिल्ली की सरकार चलाने के लिए चुनी हुई केजरीवाल सरकार की ताकत छीनने का काम किया। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्णय दिया कि ताकत चुनी हुई सरकार के पास है। इसके बाद 2020 में विधानसभा चुनाव हुए तो उसमें दिल्ली की जनता ने इसका बदला लिया। अब इन्होंने एक और चोर दरवाजा निकाला कि हम संसद में बिल लेकर आते हैं जिससे हम दिल्ली की सरकार की ताकत को छीन लेंगे। इस बार इन्होंने दिल्ली की सरकार की ताकत को छीनने का काम नहीं किया, इन्होंने दिल्ली विधानसभा की ताकत को छीनने का भी काम किया है। ऐसा असंवैधानिक बिल संसद के पटल पर नहीं आया कि आप चुनी हुई सरकार और विधानसभा को भी छीन रहे हैं।

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जिस तरीके से केंद्र सरकार सभी तरीके की संस्थाओं को ढहाती जा रही है। अभी सिर्फ यह शुरुआत है। लोकसभा के अंदर देखा जाए कि किस तरह से मर्यादा को तार तार किया जा रहा है। लोकसभा में भाजपा बहुमत में है। विपक्ष बड़े-बडे मुद्दों को उठाती हैं। सदन में शोर शराबे के बीच कानूनों को पास कर रही है। भाजपा नई मर्यादाएं बना रही है, वो आगे तक के लिए प्रजातंत्र को नुकसान पहुंचाएंगे।

दिल्ली में भाजपा की चोर नीति से उनकी हताशा का पता लगता है। इससे साफ है कि भाजपा को स्पष्ट हो गया है कि वो दिल्ली की सत्ता में नहीं आने वाले। इस वजह से भाजपा चोर दरवाजे से आकर दिल्ली की सत्ता को हथियाने की कोशिश कर रही है, यह ठीक नहीं है। केंद्र सरकार की तरफ से कमेटियों के ऊपर हमला किया जा रहा है। यह कहा जा रहा है कि कमेटियां अब जांच नहीं कर सकती। यह बेहद ही खेद की बात है और सदन की मूलभावना के खिलाफ है। सरकार की जवाबदेही इस सदन के प्रति है। यदि ऐसा कोई काम है जिसके बारे में सदन जानकारी चाहता है।

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