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लोढ़ा कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट,सट्टेबाजी को कानूनी मान्यता देने की सिफारिश

लोढ़ा कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट,सट्टेबाजी को कानूनी मान्यता देने की सिफारिश

भारतीय क्रिकेट में सुधार और BCCI में पारदर्शिता के लिए बनाई गई लोढ़ा कमेटी की रिपोर्ट तैयार हो गई है, जिसे पूर्व चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा ने आज (सोमवार) सुप्रीम कोर्ट को सौंप दिया। BCCI में नेताओं को ना रखने की सिफारिश की। आईपीएल के पूर्व सीओओ सुंदर रमन को क्लीन चिट दी। लोढ़ा पैनल ने IPL और BCCI के लिए अलग संचालन संस्थाओं सिफारिश की। सट्टेबाजी को कानूनी मान्यता देने की सिफारिश की। उन्होंने सिफारिश की कि प्रत्येक राज्य से एक संघ पूर्ण सदस्य होगा और उसे मतदान का अधिकार होगा। लोढ़ा कमेटी ने रेलवे, सेना और विश्वविद्यालय संघों को केवल एसोसिएट सदस्य बनाने की सिफारिश की। वे मतदान का अधिकार भी गंवाएंगे। न्यायमूर्ति लोढ़ा ने IPL संचालन परिषद को सीमित स्वायत्ता का प्रस्ताव रखा। संविधान और खिलाड़ियों के संघ के गठन की पेशकश की। पूर्व गृह सचिव जी के पिल्लई के नेतृत्व में संचालन समिति की सिफारिश की जिसमें मोहिंदर अमरनाथ, डायना एडुल्जी और अनिल कुंबले सदस्य होंगे। हितों के टकराव पर फैसला आचारनीति अधिकारी करेगा। BCCI का कोई भी पदाधिकारी मंत्री या सरकारी नौकर नहीं हो सकता। लोढ़ा पैनल ने कहा कि कोई भी BCCI पदाधिकारी लगातार दो से अधिक कार्यकाल तक अपने पद पर नहीं रह सकता है। सुप्रीम कोर्ट से नियुक्त लोढ़ा कमेटी ने आज विवादों से घिरे बीसीसीआई (BCCI) के लिए आमूलचूल बदलावों की सिफारिश की जिनमें मंत्रियों को पद हासिल करने से रोकना, पदाधिकारियों के लिए उम्र और कार्यकाल की समयसीमा का निर्धारण और सट्टेबाजी को कानूनी मान्यता देना भी शामिल है। न्यायमूर्ति (रिटायर) आर एम लोढ़ा की अगुवाई वाले तीन सदस्यीय पैनल ने कठोर सुधारों की सीरीज में सुझाव दिया है कि एक राज्य का प्रतिनिधित्व केवल एक इकाई करेगी जबकि संस्थानिक और शहर आधारित इकाईयों के मतदान अधिकार वापस लेने की सिफारिश की है। समिति ने BCCI के प्रशासनिक ढांचे के भी पुनर्गठन का सुझाव दिया है और सीईओ के पद का प्रस्ताव रखा है जो 9 सदस्यीय शीर्ष परिषद के प्रति जवाबदेह होगा।

सुप्रीम कोर्ट में 159 पृष्ठों की रिपोर्ट सौंपने के बाद खचाखच भरे संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए लोढ़ा ने कहा कि उन्होंने बोर्ड अधिकारियों, क्रिकेटरों और अन्य हितधारकों के साथ 38 बैठकें की। सुप्रीम कोर्ट यह फैसला करेगा कि BCCI इन सिफारिशों को मानने के लिये बाध्य है या नहीं। लोढ़ा ने सिफारिशों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा, पहली बात ढांचे और संविधान को लेकर है। अभी आप जानते हैं कि BCCI के 30 पूर्णकालिक सदस्य हैं। इनमें से कुछ सदस्यों जैसे सेना, रेलवे आदि का कोई क्षेत्र नहीं है। इनमें से कुछ टूर्नामेंट में नहीं खेलते। कुछ राज्यों में कई सदस्य हैं जैसे कि महाराष्ट्र में 3 और गुजरात में 3 सदस्य है। हमने जो बातचीत की उनमें से कुछ को छोड़कर बाकी सभी इस पर सहमत थे कि BCCI में एक राज्य से एक इकाई का प्रतिनिधित्व सही विचार होगा।

पैनल ने कहा कि BCCI के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिये इस संस्था को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत लाना जरूरी है। बोर्ड अपनी स्वायत्ता का हवाला देकर पूर्व में इसका पुरजोर विरोध करता रहा है। न्यायमूर्ति लोढा ने कहा, चूंकि BCCI सार्वजनिक कार्यों से जुड़ा है, इसलिए लोगों को इसक कामकाज और सुविधाओं तथा अन्य गतिविधियों के बारे में जानने का अधिकार है और इसलिए हमारा विचार है कि क्या BCCI पर आरटीआई अधिनियम लागू होता है या आरटीआई के अधीन आता है यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। हमने सिफारिश की है कि विधायिका को BCCI को आरटीआई अधिनियम के तहत लाने के लिये गंभीरता से विचार करना चाहिए।

BCCI पदाधिकारियों के लिए आयु और कार्यकाल की समयसीमा तय करने के बारे में समिति ने कहा कि बोर्ड के सदस्यों को तीन कार्यकाल से अधिक समय तक पद पर नहीं रहना चाहिए। न्यायमूर्ति लोढ़ा ने कहा कि अध्यक्ष तीन साल के दो कार्यकाल में रह सकता है कि लेकिन अन्य पदाधिकारी तीन कार्यकाल तक रह सकते हैं। सभी पदाधिकारियों के लिये प्रत्येक कार्यकाल के बीच अंतर अनिवार्य होगा। लोढ़ा ने कहा, BCCI के पदाधिकारियों के संबंध में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष के लिये कुछ पात्रता मानदंड तय किये गये हैं जैसे कि वह भारतीय होना चाहिए, वह 70 साल से अधिक उम्र का नहीं होना चाहिए, वह दिवालिया नहीं होना चाहिए, वह मंत्री या सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए और जिसने नौ साल की संचयी अवधि के लिये बीसीसीआई में कोई पद नहीं संभाला हो।

BCCI के संवैधानिक ढांचे में प्रस्तावित सुधारों के हिस्से के रूप में पैनल ने कहा कि बोर्ड के हर दिन के कामकाज को एक सीईओ को देखना चाहिए। पैनल ने कहा कि खिलाड़ियों का संघ भी होना चाहिए जिससे बोर्ड के कामकाज में खिलाड़ी भी अपनी बात रख सकें। न्यायमूर्ति लोढ़ा ने कहा, BCCI के एक लिए एक सर्वोच्च परिषद होनी चाहिए जिसमें नौ सदस्य हों। इनमें से पांच सदस्य निर्वाचित, दो खिलाड़ी संघ के प्रतिनिधि और एक महिला होनी चाहिए। BCCI के दैनंदिनी प्रबंधन को सीईओ देखेगा। उनकी मदद के लिये छह पेशेवर प्रबंधक होंगे तथा सीईओ और प्रबंधकों की टीम सर्वोच्च परिषद के प्रति जवाबदेह होगी।

लोढ़ा ने कहा कि खिलाड़ियों के संघ का गठन एक संचालन समिति करेगी जिसकी अगुवाई पूर्व गृह सचिव जी के पिल्लई करेंगै और इसमें पूर्व क्रिकेटर मोहिंदर अमरनाथ और अनिल कुंबले तथा पूर्व महिला क्रिकेटर डायना एडुल्जी शामिल होंगे। समिति ने कहा कि खिलाड़ियों के संघ में उन सभी को शामिल किया जाएगा जिन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेली हो।उन्होंने कहा कि खिलाड़ी संघ महज नाम के लिये नहीं होगा और वह यह सुनिश्चित करेगा कि वर्तमान और पूर्व क्रिकेटर बोर्ड में अपनी बात रख सकें।

IPL, जो कि 2013 के स्पॉट फिक्सिंग मामले के सामने आने के बाद साख के संकट से जूझ रहा है, के बारे में पैनल ने इसकी संचालन परिषद में बदलावों की सिफारिश की है। न्यायमूर्ति लोढ़ा ने कहा, IPL के संदर्भ में सिफारिश यह है कि मुख्य संचालन संस्था को संचालन परिषद के रूप में जाना जाएगा जिसमें नौ सदस्य होंगे। BCCI के सचिव और कोषाध्यक्ष इस आईपीएल संचालन परिषद के पदेन सदस्य होंगे।

IPL संचालन परिषद के दो अन्य सदस्य पूर्ण सदस्यों द्वारा नामित-निर्वाचित होंगे। बाकी पांच सदस्यों में से दो फ्रेंचाइजी द्वारा नामित, एक खिलाड़ी संघ का प्रतिनिधि और एक प्रतिनिधि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक से नामित होगा। उन्होंने कहा, IPL से संबंधित सभी फैसले IPL संचालन परिषद करेगी जिसमें वित्तीय मसलों से जुड़े फैसले भी शामिल हैं। हालांकि संचालन परिषद BCCI की आम सभा के प्रति जवादेह होगी। इसलिए IPL संचालन परिषद के लिये सीमित स्वायत्ता की पेशकश की गयी है। समिति ने इसके साथ ही सिफारिश की कि एक व्यक्ति एक समय में BCCI पदाधिकारी और राज्य संघ का पदाधिकारी दोनों पदों पर आसीन नहीं हो सकता है।

पैनल ने इसके साथ ही सुझाव दिया कि राज्य संघों को दिए जाने वाले अनुदान पर उचित निगरानी रखनी होगी। न्यायमूर्ति लोढ़ा ने कहा, हमने राज्य संघों के ढांचे और संविधान में एकरूपता की सिफारिश की है जैसे कि संघ का कोई आजीवन सदस्य या 9 साल से अधिक समय तक सदस्य नहीं होना चाहिए, राज्य संघों में सामाजिक और क्रिकेट गतिविधियों का पृथक्करण और प्राक्सी मतदान नहीं होना चाहिए। इनके कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिये उनके खातों की लेखा परीक्षण BCCI को करना चाहिए।

उन्होंने कहा, उन्हें हितों के टकराव के संकल्प, आचार संहिता की व्यवस्था, व्यवहार और भ्रष्टाचार जैसे मसलों पर BCCI के दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए। राज्य संघों द्वारा निर्देशों का किसी भी तरह से उल्लंघन वे बीसीसीआई से मिलने वाली छूट और अनुदान के हक से वंचित हो सकते हैं। समिति ने आचारनीति अधिकारी के कार्यालय के गठन की भी सिफारिश की जो हितों के टकराव से संबंधित मसलों को सुलझाने के लिये जिम्मेदार होगा। इसके अलावा पैनल ने बोर्ड के चुनाव कराने के लिये निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति की भी सिफारिश की।

लोढ़ा ने कहा, हमने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश को आचारनीति अधिकारी नियुक्त करने की सिफारिश की है। इसके अलावा निर्वाचन अधिकारी का पद सृजित करने का भी प्रस्ताव रखा है जो पदाधिकारियोंके चुनावों से जुड़ी पूरी निर्वाचन प्रक्रिया को देखेगा। इसमें मतदाताओं की सूची को तैयार करना, प्रकाशन और पदाधिकारियों की पात्रता से जुड़े विवाद शामिल हैं। उन्होंने कहा, निर्वाचन अधिकारी का नामांकन चुनावों से कम से कम दो सप्ताह पहले करना होगा और इस तरह का अधिकारी पूर्व चुनाव आयुक्त होना चाहिए। इसके अलावा पैनल ने कहा कि अंदरूनी टकरावों से निबटने के लिये बोर्ड का लोकपाल भी होना चाहिए। बोर्ड ने पिछले साल नवंबर में एपी शाह की नियुक्ति करके यह सुझाव पहले ही मान लिया है।

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