November 29, 2022

सभी डीसीपी को यौन उत्पीड़न की शिकायतों का ब्यौरा पेश करने का दिल्ली पुलिस कमिश्नर का आदेश

पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा ने सभी 15 जिलों के डीसीपी को पिछले पांच वर्षों में आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) द्वारा प्राप्त यौन उत्पीड़न की शिकायतों का ब्यौरा पेश करने का आदेश दिया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही में पुलिस आयुक्त और पुलिस उपायुक्त दक्षिण जिला को एक महिला पुलिस की याचिका पर नोटिस जारी किया था, जिसमें याचिकाकर्ता ने यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायतों के निवारण के लिए आईसीसी के गठन की मांग की थी।

उक्त नोटिस के बाद आयुक्त ने विगत 30 सितंबर को सभी जिले के डीसीपी से जवाब मांगा है कि पिछले पांच वर्षों में 30 सितंबर तक आईसीसी में उनके जिले में यौन उत्पीड़न की कितनी शिकायतें आईं। डीसीपी से यह भी पूछा है कि कितनी शिकायतों की पुष्टि हुई, कितनी शिकायतें दर्ज की गईं और लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की गई।

याचिकाकर्ता अपने वरिष्ठ उप निरीक्षक के खिलाफ दर्ज एक मामले में यौन उत्पीड़न की शिकार है। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार घटना के तीन महीने के भीतर आईसीसी का गठन किया जाना चाहिए था लेकिन आज तक ऐसा नहीं किया गया है।

न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा ने 28 सितंबर को दिल्ली सरकार, पुलिस आयुक्त और डीसीपी साउथ को याचिका पर नोटिस जारी किया था। मामला दिल्ली पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर के खिलाफ याचिकाकर्ता की शिकायत पर तीन अगस्त 2021 को मालवीय नगर थाने में दुष्कर्म व धमकी की धाराओं के तहत प्राथमिकी से संबंधित है।

अधिवक्ता रणधीर लाल शर्मा के माध्यम से दायर याचिका में पुलिस उपायुक्त दक्षिण जिला को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा निर्देशों के अनुसार वर्तमान यौन उत्पीड़न की शिकायतों के निवारण के लिए आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) का गठन करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ को बताया कि आज तक आईसीसी का गठन नहीं हुआ है जबकि इसे तीन महीने के भीतर होना चाहिए था। यह विशाखा केस और एक्ट के दिशा निर्देशों का उल्लंघन है।

आरोपित उप निरीक्षक उच्च न्यायालय से अंतरिम सुरक्षा और विभाग में ड्यूटी पर तैनात है। स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और याचिकाकर्ता की सुरक्षा के लिए अधिवक्ता ने उसे तुरंत निलंबित करने की मांग की।

याचिका में आरोपित उप निरीक्षक के खिलाफ तत्काल विभागीय जांच के निर्देश देने की मांग की गई है साथ ही यह सवाल उठाया है कि क्या अपराधी पुलिस अधिकारी पर गंभीर आरोप लगने के बावजूद सेवा में बने रहना उपयुक्त है।

मौजूदा मामले में आईसीसी का गठन नहीं होने के बावजूद चार्जशीट दाखिल की गई है। आरोप है कि आरोपित सब इंस्पेक्टर द्वारा पीड़िता को परेशान किया जा रहा है।

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