December 7, 2022

सीमा सुरक्षा बल की 29वीं अन्तर सीमान्त जलक्रीड़ा प्रतियोगिता एवं 39वीं अंतर सीमान्त क्राॅस कन्ट्री प्रतियोगिता (2014) का भव्य समापन।

16 जुलाई 2014 को के. के. शर्मा, भारतीय पुलिस सेवा, अतिरिक्त्त महानिदेशक (संक्रिया), सीमा सुरक्षा बल, ने छावला कैम्प, नई दिल्ली स्थित रूस्तमजी तरणताल पर सीमा सुरक्षा बल की 29वीं अन्तर सीमान्त जलक्रीडा प्रतियोगिता एवं 39वीं क्राॅस कन्ट्री प्रतियोगिता का समापन किया। मुख्य अतिथि शर्मा के सम्मान में देश के कोने कोने से आए बल के सभी सीमान्तों की टीमों ने एवम् सीमा सुरक्षा बल के बैंड ने शानदार परेड प्रस्तुत किया। इस अवसर पर बल के तेैराकों द्वारा ‘सिंक्रोनाइज्ड एवम् व्यक्त्तिगत गोताखोरी’ का खूबसूरत प्रदर्शन भी किया गया।

फाइनल प्रतियोगिता की समाप्ति के उपरांत समारोह के मुख्यातिथि – के. के. शर्मा, भारतीय पुलिस सेवा, अतिरिक्त्त महानिदेशक (संक्रिया), ने सीमा सुरक्षा बल की 29वीं अन्तर सीमान्त जलक्रीडा प्रतियोगिता एवं 39वीं क्राॅस कन्ट्री प्रतियोगिता 2014 के विजेताओं को पदक तथा ट्राफियाँ वितरित कीं।
विजेताओं की सूची इस प्रकार है –

तैराकी :

बी एस एफ साउथ बंगाल फ्रंटियर स्टूड फर्स्ट (प्रथम)
बी एस एफ जम्मू फ्रंटियर स्टूड (द्वितीय)
बी एस एफ राजस्थान फ्रंटियर स्टूड (तृतीय)

वाटर पोलो

बी एस एफ पंजाब फ्रंटियर स्टूड फर्स्ट (प्रथम)
बी एस एफ त्रिपुरा फ्रंटियर स्टूड (द्वितीय)
बी एस एफ राजस्थान फ्रंटियर स्टूड (तृतीय)

क्रॉस कंटरी

बी एस एफ साउथ बंगाल फ्रंटियर स्टूड फर्स्ट (प्रथम)
बी एस एफ जम्मू फ्रंटियर स्टूड (द्वितीय)
बी एस एफ राजस्थान फ्रंटियर स्टूड (तृतीय)

समारोह का समापन मुख्य अतिथि के. के. शर्मा, भारतीय पुलिस सेवा, अतिरिक्त्त महानिदेशक (संक्रिया), सीमा सुरक्षा बल, की औपचारिक उद्घोषणा -‘सीमा सुरक्षा बल की 29वीं अन्तर सीमान्त जलक्रीडा प्रतियोगिता व 39वीं अन्तर सीमान्त क्राॅस कन्ट्री प्रतियोगिता का समापन ’ के साथ हुआ। मुख्य अतिथि ने इस अवसर पर रंग-बिरंगे गुब्बारे छोड़े और अपने समापन भाषण में प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए इस प्रतियोगिता में उनके द्वारा किये गये सर्वश्रेठ प्रदर्शन के लिये उन्हें ढेर सारी बधाईयाँ दीं।

अपने गठन के आरंभिक वर्षो से ही खेलों के क्षेत्र में सीमा सुरक्षा बल का उत्कृषट रिकाॅर्ड रहा है। बल में प्रारम्भिक स्तर से ही खेलो को प्रोत्साहन देने की परिपाटी रही है। जिससे कि एक स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण बना रहे और इसके अधिकारी एवं जवान स्वस्थ्य खेल संस्कृति के मुताबिक अपना प्रदर्शन कर सकंे। इस परंपरा और प्रोत्साहन के ही सुखद परिणाम हैं कि बल के खिलाडि़यों ने न सिर्फ रा”ट्रीय प्रतिस्पद्र्धाओं में, बल्कि अन्तर्रा”ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी बल का नाम रोशन किया है और पदम्श्री, अर्जुन पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित हुए हंै।

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