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सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर:दिल्ली के आसपास प्रदूषणकारी 10 थर्मल पावर प्लांटों को बंद करने की मांग :दिल्ली सरकार

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर:दिल्ली के आसपास प्रदूषणकारी 10 थर्मल पावर प्लांटों को बंद करने की मांग :दिल्ली सरकार

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। उठाए गए इन कदमों के बीच दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर दिल्ली के आसपास पुराने और प्रदूषण पैदा करने वाली पुरानी तकनीक से चल रहे 10 थर्मल पावर प्लांटों को बंद करने की मांग की है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कोयले से चलने वाले इन 10 थर्मल पावर प्लांट दिल्ली-एनसीआर की हवा को प्रदूषित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली सरकार, दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए कई कदम उठा रही है। साथ ही, पत्र लिखकर केंद्र सरकार से इन थर्मल पावर प्लांटों से होने वाले प्रदूषण के संबंध में सहयोग का अनुरोध भी कर रहे हैं, लेकिन केंद्र से अभी तक कोई मदद नहीं मिली है।

सीएम अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली सरकार दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए कई अहम कदम उठा रही है। दिल्ली सरकार, दिल्ली के सभी उद्योगों को स्वच्छ ईंधन में बदलवा रही है, 24 घंटे बिजली प्रदान कर रही है और देश की सबसे प्रगतिशील इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पाॅलिसी लाई है। इसके अलावा, वायु प्रदूषण से संबंधित जनता की शिकायतों के लिए ग्रीन एप, राजधानी के सभी थर्मल पावर प्लांटों को बंद करने, रेड लाइट ऑन-व्हीकल ऑफ अभियान, पराली की समस्या से निपटने के लिए बायो डीकंपोजर आदि कदम उठाए गए हैं।

टेरी द्वारा 2018 में किए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि दिल्ली में पीएम-2.5 का 60 फीसद हिस्सा दिल्ली के बाहरी स्रोतों से पैदा होता है। दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार के साथ समय-समय पर होने वाली विभिन्न बैठकों में प्रदूषण फैलाने वाले इन थर्मल पावर प्लांटों का मुद्दा उठाती रही है। दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को 14 अक्टूबर 2020 को दिए अपने प्रत्यावेदन में दिल्ली की जनता के स्वास्थ्य पर मंडराते प्रदूषण के खतरे का हवाला देते हुए नियमों का उल्लंघन कर चलने वाले इन गैर संगत पाॅवर प्लांटों को बंद करने की मांग की थी। सीपीसीबी को भी 15 अक्टूबर 2020 दिए अपने प्रत्यावेदन में दिल्ली सरकार ने इन 10 थर्मल पावर प्लांटों को बंद करने की मांग करते हुए निर्धारित समय सीमा के अंदर आवश्यक तकनीकी उपाय करने में असफल रहने पर उसका ध्यान आकर्षित किया था। विभिन्न अध्ययनों ने भी कोयले से चलने वाले ऐसे पावर प्लांटों से जन समुदाय के स्वास्थ्य पर प्रदूषकों के प्रभावों पर प्रकाश डाला है। शारीरिक रूप से कमजोर लोगों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, अस्थमा और फेफड़ों की बीमारियों से पीड़ित लोगों पर इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव पडता है।

पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली सरकार, दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए कई कदम उठा रही है। हम केंद्र सरकार को भी पत्र लिख रहे हैं और उनसे थर्मल प्लांटों से होने वाले प्रदूषण के संबंध में सहयोग का अनुरोध कर रहे हैं। हालांकि, इन थर्मल प्लांटों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है, बल्कि जनता के स्वास्थ्य की पूरी तरह से अनदेखी करते हुए इन्हें प्रदूषण पैदा करने की अनुमति दी जा रही है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट आवश्यक कदम उठाएगा और तत्काल इन प्लांटों को बंद करने का आदेश देगा।

यह याचिका पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कोयले से चलने वाले 10 थर्मल पावर प्लांट्स के संबंध में दायर की गई है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की वायु को प्रदूषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह 10 थर्मल पावर प्लांट दादरी एनसीटीपीपी (यूपी), हरदुआगंज टीपीएस (यूपी), जीएच टीपीएस (लेहरा मोहब्बत) (पीबी), नाभा टीपीपी (पीबी), रोपड़ टीपीएस (पीबी), तलवंडी साबो टीपीपी (पीबी) यमुनानगर टीपीएस (एचआर), इंदिरा गांधी एसटीपीपी (एचआर), पानीपत टीपीएस (एचआर), राजीव गांधी टीपीएस (एचआर) हैं।

केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा इन थर्मल पावर प्लांटों को दी गई अनुपालन समय सीमा को संशोधित कर दिसंबर 2019 कर दिया गया था, जबकि उसके पहले 2018 की समय सीमा दी गई थी। वहीं, सीपीसीबी ने मनमाने तरीके से उत्सर्जन मानदंडों के अनुपालन की समय सीमा को दिसंबर 2019 से आगे बढ़ाकर 2022 कर दिया है। इसके अलावा, नई अधिसूचना के अनुसार, मानदंडों का अनुपालन न करने पर प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयां बंद नहीं होंगी, बल्कि वे महज कुछ जुर्माना राशि का भुगतान कर प्रदूषण जारी रखेंगी।

देरी के अलावा, सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पावर प्लांट संचालकों ने 2003 और 2016 के बीच स्थापित बिजली प्लांटों के लिए एनओएक्स मानदंडों को भी कमजोर किया है। यह अनुमान लगाया गया है कि एसओ-2 और एनओएक्स नियंत्रण सुविधाओं की स्थापना में देरी के कारण 2018 के परिचालन स्तर पर दिल्ली-एनसीआर के आसपास के क्षेत्रों में प्रतिदिन 13 से अधिक मौतें और 19 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है, जो अगर पावर प्लांटों को 2018 की तुलना में अधिक संचालित किया जाता है, तो यह बढ़ सकता है।

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